लॉकडाउन के कारण कोलकाता में जूट मिलों के बंद होने से गेहूं खरीद के समय बोरों की कमी को दूर करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार पुराने बोरों की खरीद करेगी। बोरों की खरीद संबंधी प्रस्ताव को शुक्रवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन में मंजूरी दे दी गई।
दरअसल प्रदेश में गेहूं की खरीद चल रही है और सरकार को पर्याप्त संख्या में बोरे नहीं मिल पा रहे हैं। जूट के बोरों की सप्लाई कोलकाता की जूट मिलों से होती है, पर वहां उत्पादन बंद होने की वजह से बोरों की कमी हो गई है।
इस दिक्कत को देखते हुए पुराने बोरों को खरीद कर उनसे काम चलाए जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। शुक्रवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन में इस पर मुहर लगा दी गई।
प्रमुख सचिव खाद्य व रसद निवेदिता शुक्ला वर्मा ने बताया कि सरकार ने पुराने बोरों की खरीद करने पर सहमति दे दी है। उन्होंने कहा कि गेहूं खरीद प्रभावी होने की वजह से बोरों की तत्कालिक आवश्यकता है। चूंकि इसके लिए टेंडर करने में प्रक्रिया और समय लगता, लिहाजा विभाग सीधे कोटेदारों से खरीद करेगा।
राशन की दुकानों पर आने वाले उन बोरों की खरीद की जाएगी जो अच्छी दशा में हों। बोरों की गुणवत्ता के लिए क्वॉलिटी चेक समिति बनाई जा रही है, जिसमें एफसीआई भी शामिल रहेगा।
उन्होंने कहा कि विभाग ने पुराने बोरों को बीस रुपए प्रति बोरे के हिसाब से खरीदने का प्रस्ताव रखा है। इस पर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार को करना है। फिलहाल बोरों की खरीद के समय आधे दाम का भुगतान कर दिया जाएगा और केंद्र से दाम तय होने के बाद शेष राशि का भुगतान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्लास्टिक के भी कुछ बोरे लिए जा रहे हैं।