कई पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अफसरों का कहना है कि खीरी की घटना में प्रारंभिक तौर पर खुफिया तंत्र की विफलता या सूचना होने पर कदम न उठाए जाने, प्रशासनिक पूर्वानुमान में चूक के साथ गृह राज्यमंत्री जैसे जिम्मेदार नेता के बड़बोलेपन के अलावा आंदोलनकारी किसानों के बीच कुछ अराजकतत्वों की पहुंच जैसे कई कारण सामने आ रहे हैं।
अपर मुख्य सचिव डा. देवेश चतुर्वेदी व एडीजी कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार जैसे सीनियर अफसरों को तत्काल मौके पर भेजने का फैसला हुआ। इससे सरकार को प्रारंभिक स्तर पर सही तथ्य की जानकारी और आगे निर्णय में आसानी हुई। फिर, आग में घी का काम करने के लिए घटना के तत्काल बाद मौके पर जाने पर अड़े विपक्षी नेताओं को रोकना बहुत अहम था।