शाह ने योगी को प्रदेश को दंगामुक्त कराने वाला और मच्छर व माफिया से मुक्त कराने वाला बताकर न सिर्फ यह समझाने की कोशिश की कि कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर भाजपा सरकार ने किस तरह काम किया है, बल्कि यह संदेश देने की भी कोशिश की कि योगी परिपक्व और कठोर प्रशासक हैं। शाह ने आजमगढ़ को सरस्वती धाम तथा योगी ने आर्यमगढ़ कहकर एक तरह से इस इलाके की कट्टरवादी पहचान को भी बदलने के संकेत दिए। जिस तरह आजमगढ़ की छवि आतंकवादियों के गढ़ की रही है, उसको देखते हुए शाह और योगी की बातों के दूरगामी निहितार्थ काफी अहम हैं।
राजनीतिक गणित भी है अहम
पूरे पूर्वांचल की बात करें तो यहां लोकसभा की 22 और विधानसभा की 124 सीटें हैं। वर्ष 2019 में भाजपा को 2014 के मुकाबले लोकसभा चुनाव में कम सीटें मिलीं। ऊपर से आजमगढ़ भाजपा की प्रमुख प्रतिद्वंद्वी सपा का ऐसा गढ़ है जहां 2014 हो या 2017 अथवा 2019, भाजपा को वैसी सफलता नहीं मिली जैसी पूर्वांचल के अन्य स्थानों पर मिली। आजमगढ़ मंडल में आजमगढ़, मऊ और बलिया को मिलाकर विधानसभा की 21 सीटें हैं।
इनमें 2017 में भाजपा को नौ सीटें मिली थीं। मंडल की 21 सीटों में सिर्फ आजमगढ़ में ही विधानसभा की 10 सीटें हैं। इनमें 2017 में पांच पर सपा और चार पर बसपा का कब्जा हुआ था। भाजपा को मात्र एक सीट पर जीत मिली थी। आजमगढ़ से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के सांसद होने से यह एक तरह पूर्वांचल में सपा की साख का भी प्रतीक है। इसीलिए भाजपा के लिए सपा के इस गढ़ पर फतह का अर्थ कई समीकरण साधता है।
शाह ने वाराणसी पहुंचने के महामना मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण और प्रणाम, मंदिरों में दर्शन-पूजन तथा एक कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित व पूर्व राज्यपाल एवं विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष केशरीनाथ त्रिपाठी को साथ बैठाकर एक तरह हिंदुत्व से लेकर ब्राह्मणों के समीकरणों तक जो काम किया है, उसके पीछे पूर्वांचल के इस इलाके के समीकरणों को भाजपा के और अनुकूल बनाने का प्रयास है।