उत्तर प्रदेश में भी जेलों में बंद अपराधियों का ‘कस्टडी सर्टिफिकेट’ बनाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद जेल विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए यूपी पुलिस के तकनीकी सेवा के अधिकारी हरियाणा पुलिस के ‘वारदात सॉफ्टवेयर’ का अध्ययन करेंगे। यह बातें बृहस्पतिवार को डीजीपी मुकुल गोयल की ओर से आयोजित बैठक में सामने आईं।
डीजी जेल आनंद कुमार ने बताया कि कस्टडी सर्टिफिकेट में अपराधी का पूरा ब्योरा होगा। मसलन पहली वारदात कब की, कितने केस दर्ज, जेल में कब दाखिल हुआ, कब बेल मिली। अब डीजीपी ने निर्देश दिए कि गिरफ्तारी के समय अपराधियों का आधार कार्ड भी लिया जाए। यूपी पुलिस के पास भी त्रिनेत्र और सीसीटीएनएस जैसे सॉफ्टवेयर हैं, जिनपर अपराधियों का पूरा डाटाबेस मौजूद है। ऐसे में हरियाणा पुलिस द्वारा तैयार सॉफ्टवेयर यूपी पुलिस के एप से कितना भिन्न है, इसका अध्ययन किया जाएगा। इसके अलावा डीजीपी ने अधिक समय से लंबित यातायात चालानों की भी समीक्षा की।
बैठक में डीजीपी और डीजी जेल के अलावा एडीजी जेल संजय एम तरडे, एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार, एडीजी अभियोजन आशुतोष पांडेय, एडीजी अपराध केएस प्रताप कुमार, जीएसओ रवि जोसेफ लोक्कु, एडीजी ट्रैफिक ज्योति नारायण, आईजी टेकिभनकल सर्विसेज मोहित अग्रवाल, डीआईजी लोक शिकायत अमित पाठक समेत कई अधिकारी मौजूद थे।