संजय निषाद का दांव गया खाली
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भाजपा ने बृहस्पतिवार को अपने कोटे की 8 में से 7 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिया था, लेकिन कानपुर की सीसामऊ सीट पर मामला काफी देर तक उलझा रहा। सूत्रों के मुताबिक इस सीट पर पेंच फंसने की वजह से मजबूत दावेदारी रही। पूर्व सांसद सत्यदेव पचौरी की बेटी नीतू सिंह और दलित बिरादरी के प्रभावशाली चेहरा माने जाने वाले राकेश सोनकर की प्रबल दावेदारी की वजह से पार्टी नेतृत्व फैसला लेने में उलझा रहा। दोनों के बीच टिकट को मचे घमासान को देखते हुए नेतृत्व ने सुरेश अवस्थी का नाम फाइनल किया है। इस वजह से सुबह जारी की गई सूची में सीसामऊ सीट पर उम्मीदवार घोषित नहीं किया गया था। इस सीट पर शाम को उम्मीदवार की घोषणा हुई।
पांच सीटों पर कॉडर को तरजीह
लोकसभा में कॉडर की उपेक्षा से हुए नुकसान से सतर्क भाजपा ने उप चुनाव में कॉडर को तरजीह दिया है। अपने कोटे की आठ सीटों में पांच सीटों पर कॉडर के पुराने नेताओं को ही टिकट दिया है। गाजियाबाद, खैर, मझंवा, सीसामऊ और कुंदरकी सीट पर पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं को टिकट दिया गया है, जबकि कटेहरी और फूलपुर सीट से बसपा और करहल सीट से मुलायम परिवार से भाजपा में आए चेहरों पर दांव लगाया है।
काम न आया निषाद का दबाव
उप चुनाव में दो सीटें लेने पर अड़े एनडीए के सहयोगी निषाद पार्टी के अध्यक्ष व कैबिनेट मंत्री संजय निषाद के सारे हथकंडे बेकार साबित हुए। उनके स्तर से हर स्तर पर बनाया गया दबाव बेअसर रहा। बता दें कि संजय निषाद ने कटेहरी व मझवां सीट पर दावेदारी कर रखी थी। 2022 में भी ये दोनों सीटें उन्हें दी गई थी। इसी को आधार पर बनाकर संजय उप चुनाव में भी दोनों सीटें मांग रहे थे। लेकिन केन्द्रीय नेतृत्व ने उन्हें एक सीट भी नही दिया है। सूत्रों का कहना है कि भाजपा नेतृत्व में निषाद को उप चुनाव न लड़ने पर राजी कर लिया है।