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यूपी उपचुनाव: जानिए सभी आठ प्रत्याशियों का लेखा-जोखा, करहल सीट पर अखिलेश के बहनोई पर लगाया दांव

Thu, 24 Oct 2024 09:00 PM IST
रोहित मिश्र सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला, लखनऊ

सार

UP by-election:यूपी भाजपा ने सभी आठ सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। खास बात यह है कि  प्रत्याशियों के चयन में उसने स्थानीयता और जाति का विशेष का ख्याल रखा है। 
 
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यूपी भाजपा प्रत्याशियों की लिस्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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लंबी माथापच्ची के बाद नामांकन की अंतिम तिथि से एक दिन पहले भाजपा ने विधानसभा उपचुनाव के लिए अपने कोटे की सभी 8 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिए। नौवीं सीट मीरापुर से रालोद ने मिथिलेश पाल को प्रत्याशी बनाया है।

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सीसामऊ-सुरेश अवस्थीः छात्रनेता रहे हैं और भाजपा से कॉडर कार्यकर्ता हैं। जिला संगठन में उपाध्यक्ष और प्रदेश संगठन में मंत्री भी रह चुके हैं। सुरेश 2017 में सीसामऊ सीट के भाजपा के टिकट पर चुनाव भी लड़े थे, लेकिन सपा के इरफान सोलंकी से 5826 वोटों से चुनाव हार गए थे। एक बार पार्टी ने इन्हे फिर से सुरेश पर दांव लगाया है। इनके सामने सपा उम्मीदवार के तौर इरफान की पत्नी नसीम सोलंकी को उतारा है।

करहल- अनुजेश यादवः मुलायम परिवार के दामाद अनुजेश यादव रिश्ते में अखिलेश यादव के बहनोई हैं। आजमगढ़ से सपा सांसद धर्मेंन्द्र यादव के सहे बहनोई है। वह पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। भाजपा के सक्रिय नेताओं में उनकी गिनती होती है। यादव बहुल करहल सीट पर सवा लाख यादव मतदाता हैं। दूसरे स्थान पर शाक्य, तीसरे पर बघेल और क्षत्रिय मतदाता हैं। उनके सामने अखिलेश ने भतीजे तेज प्रताप हैं। इस तरह उप चुनाव में इस सीट पर फुफा-भतीजे में सीधा मुकाबला होगा।
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गाजियाबाद-संजीव शर्माः भाजपा का गढ़ रहे इस सीट पर इस बार ब्राम्हण चेहरा के तौर पर उतारे गए संजीव शर्मा पहली बार चुनाव मैदान में उतरे हैं। संजीव लगातार दो बार से गाजियाबाद के महानगर अध्यक्ष हैं। अच्छे संगठनकर्ता माने जाते हैं। 2022 का विधानसभा चुनाव, 2023 में स्थानीय निकाय चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत में इनके संगठन की बड़ी भूमिका मानी जाती है। माना जा रहा है पार्टी ने उसका ही इनाम दिया है।

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फूलपुर और कटेहीर पर चला ये दांव 

दीपक पटेल, प्रत्याशी फूलपुर विधानसभा। - फोटो : अमर उजाला।
मझवां- सुचिस्मिता मौर्यः 2017 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से विधायक रहीं हैं। लेकिन 2022 में यह सीट एनडीए के सहयोगी निषाद पार्टी को दे दी गई थी, इस वजह से सुचिस्मिता चुनाव नहीं लड़ पाई थीं। इनके ससुर रामचंद्र मौर्या भी 1996 में इस सीट से भाजपा विधायक रह चुके हैं। 2022 में चुनाव लड़ने से वंचित रहने के बाद भी सुचिस्मिता लगातार क्षेत्र में संपर्क बनाए रखी और सक्रिय रही हैं।

कुंदरकी- ठाकुर रामवीर सिंह- करीब तीन दशक से अपने राजनीतिक जीवन में भाजपा से जुडे रहे हैं। रामवीर सबसे पहला चुनाव 2007 में मुरादाबाद ग्रामीण सीट से भाजपा उम्मीदवार के तौर पर लड़े, लेकिन दूसरे नंबर पर रहे। इसके बाद भाजपा ने इन्हें 2012 व 2017 में भी चुनाव लड़ाया था. लेकिन चुनाव हार गए थे। पार्टी ने इस सीट से तीसरी बार रामवीर पर दांव लगाया है। इस बार भी उनका मुकाबला सपा के पूर्व विधायक रिजवान से है।

खैर-सुरेंद्र दिलेरः हाथरस से पूर्व सांसद राजवीर दलेर के पुत्र हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में इनके पिता का टिकट काटकर भाजपा ने खैर सीट से विधायक रहे अनूप वाल्मीकी को लोकभा चुनाव लड़ाया था। इसकी भरपाई के लिए ही अब भाजपा ने सुरेन्द्र उर्फ दीपक दिलेर को इस सीट पर उतारा है। दीपक पहली बार चुनावी मैदान में उतर रहे हैं। हालांकि पिता के चुनाव प्रबंधन का अनुभव है। 2022 के विधानसभा चुनाव में दीपक टिकट के दावेदार थे, लेकिन टिकट नहीं मिला था।

फूलपुर-दीपक पटेल- बसपा से भाजपा में आए हैं। 2007 में प्रयागराज की बारा सीट से बसपा से पहला चुनाव लड़े थे, लेकिन कुछ मतों से हार गए थे। 2012 में भी बसपा ने इन्हें करछना विधानसभा से चुनाव लड़ाया था और चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने थे। 2017 में करछना विधानसभा सीट से बसपा से चुनाव लड़े थे, लेकिन हार गए। इसके बाद ये भाजपा में आ गए थे। 2019 में फूलपुर लोकसभा सीट से इनकी मां केशरी देवी पटेल भाजपा के टिकट पर चुनाव जीती थीं, लेकिन 2024 में इनका टिकट कट गया था। उसकी भरपाई के लिए भाजपा ने ही दीपक को उतारा है।

कटेहरी-धर्मराज निषाद- बसपा कॉडर के पुराने नेता रहे धर्मराज निषाद 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले ही भाजपा में शामिल हुए थे और भाजपा ने इन्हे टिकट भी दिया था, लेकिन चुनाव नहीं जीत पाए थे। हालांकि इससे पहले बसपा उम्मीदवार के तौर पर धर्मराज 1996, 2002 और 2007 में इस सीट विधायक चुने जा चुके हैं। बसपा ने इन्हें 2012 में जौनपुर के शाहगंज से प्रत्याशी से भी उतारा था, लेकिन हार गए।


 
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