केजीएमयू में रविवार रात जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल ने दो मरीजों की जान ले ली। जहां एक बच्चे की सांस पीडियाट्रिक विभाग में थम गई तो तीन अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद इलाज न मिलने पर एक अन्य मरीज ने भी दम तोड़ दिया। घंटों तक मरीजों को तड़पाने के बाद जूनियर डॉक्टर काफी समझाने पर रात करीब तीन बजे काम पर लौटे।
इलाज न मिलने से थमीं सांसे
रायबरेली की ज्योति बाजपेई के पांच दिन के शिशु को सांस लेने में दिक्कत से दूध पीने में मुश्किल हो रही थी। परिवारीजनों ने उसे केजीएमयू के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में भर्ती कराया।
ऑपरेशन के बाद शिशु को वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। रात में हालत बिगड़ने पर परिवारीजनों ने डॉक्टरों को बुलाया। लेकिन उन्होंने कार्य बहिष्कार का हवाला देकर तीमारदारों को लौटा दिया। नाना देवीशंकर का आरोप है कि डॉक्टरों ने उनकी एक न सुनी। इलाज न मिलने से रात करीब 12 बजे शिशु की मौत हो गई।
....इसलिए की थी हड़ताल
- फोटो : डेमो
वहीं छत से गिरे खैराबाद के निखिल (14) को परिवारीजन लेकर निजी अस्पताल पहुंचे। हालत गंभीर देखकर उसे ट्रॉमा सेंटर भेजा गया।
यहां डॉक्टरो के कार्य बहिष्कार से निखिल को इलाज नहीं मिला तो परिवारीजन उसे लेकर विवेकानंद हॉस्पिटल पहुंचे। यहां भी गंभीर हालत के चलते उसे भर्ती नहीं किया गया। बलरामपुर अस्पताल ले जाते समय बच्चे की एंबुलेंस में ही सांसें थम गईं।
केजीएमयू में भर्ती बच्चे की रविवार रात 11.30 बजे हालत गंभीर हो गई। कुछ देर बाद उसने दम तोड़ दिया। परिवारीजनों ने जूनियर डॉक्टरो से हाथापाई, अभद्रता की थी।
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इस पर वे हड़ताल पर चले गए थे। मामले में देर रात पुलिस ने तीन को हिरासत में लिया। वहीं ट्रॉमा सेंटर में भी तीन घंटों तक काम ठप रखा। करीब 50 मरीज लौटा दिया गया।
हड़ताल से मौते नहीं
जूनियर डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार से न ही बाल रोग विभाग और न ही ट्रॉमा सेंटर में कोई मौत हुई है। - डॉ. एसएन शंखवार, सीएमएस