अयोध्या में कारसेवक पुरम उनका आशियाना रहा। वे रामजन्म भूमि के मामले के मुकदमे में अक्तूबर 1994 से हाईकोर्ट की बेंच में मुकदमे की पैरवी करते रहे। बाद में रामलला का सखा घोषित होने पर पक्षकार के रूप में लखनऊ से लेकर दिल्ली तक पैरवी का क्रम जारी रहा।
रामलला के सखा रहे त्रिलोकी नाथ पांडेय के निधन पर राम मंदिर ट्रस्ट सहित विहिप, संघ व संतो ने शोक संवेदना व्यक्त की है। सब ने कहा कि उन्होंने आजीवन राम मंदिर का सपना जिया । मंदिर निर्माण तो उनकी आंखों के सामने शुरू हो चुका है लेकिन राम मंदिर में रामलला के दर्शन की इच्छा अधूरी रह गई।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्र कहते हैं कि राम मंदिर के हक में सुप्रीम कोर्ट से जो फैसला आया उसमें रामलला के सखा के रूप में उनका मुकदमा बहुत ही महत्वपूर्ण साबित हुआ। उनका निधन शोकाकुल करने वाला है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने कहा कि अस्वस्थ रहने के बावजूद भी वे लखनऊ से लेकर दिल्ली तक रामलला के लिए कोर्ट का चक्कर लगाते थे।
उनका दृढ़ विश्वास था कि एक न एक दिन रामलला के हक में निर्णय आएगा। यही हुआ निर्णय भी आया और राम मंदिर का निर्माण भी शुरू हो चुका है। बस भव्य राम मंदिर में रामलला के दर्शन की उनकी इच्छा अधूरी रह गई।