मेरठ मंडल की गन्ना रिजर्वेशन बैठक में शनिवार को भारी हंगामा हुआ। बैठक शुरू होते ही किसान बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान कराने की मांग पर अड़ गए। उन्होंने कहा कि हमें जेल भेजो या डिफॉल्टर चीनी मिलों को। किसानों के हंगामे के चलते बैठक डेढ़ घंटा बाधित रही।
डालीबाग स्थित गन्ना किसान संस्थान में मेरठ मंडल के पांच जिलों की गन्ना रिजर्वेशन बैठक शुरू होते ही किसानों ने बकाया भुगतान की मांग शुरू कर दी। सिंभावली, बृजनाथपुर, मोदीनगर व किनौनी शुगर मिल क्षेत्र के किसान ज्यादा मुखर थे। गन्ना आयुक्त संजय आर भूसरेड्डी के पूछने पर विभागीय अधिकारियों ने बताया कि सिंभावली चीनी मिल पर 65 फीसदी, रघुनाथपुर पर 58 प्रतिशत और मोदीनगर मिल पर पिछले साल का 75 फीसदी से ज्यादा गन्ना मूल्य बकाया है।
किसानों ने कहा कि इससे भी ज्यादा बकाया है। भूसरेड्डी ने कहा कि सिंभावली व रघुनाथपुर चीनी मिल की आरसी जारी की जाएगी और आवश्यक वस्तु अधिनियम 3/7 के तहत कार्रवाई की जाएगी। किसान इससे संतुष्ट नहीं हुए। वे मंच पर बोल रहे भूसरेड्डी के सामने ही धरना देकर बैठ गए।
किसानों का कहना था कि उन्हें न तो गन्ना मूल्य भुगतान कराया जा रहा है और न ही बकाया राशि पर ब्याज दिलाया जा रहा है। अफसरों को केवल शुगर लॉबी की फिक्र है, किसानों की नहीं। जब तक अफसरों का साल भर तक वेतन नहीं रोका जाएगा, उन्हें किसानों का दर्द महसूस नहीं होगा। लागत बढ़ती जा रही है, लेकिन सरकार ने न तो गन्ना मूल्य बढ़ाया और न ही समय से भुगतान कराया। गन्ना आयुक्त ने बकाया भुगतान के लिए कड़ी कार्रवाई की घोषणा की तब जाकर किसान शांत हुए और बैठक शुरू हुई।