लखनऊ विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग के व्हाट्सएप ग्रुप में अश्लील वीडियो व मेसेज भेजने वाले छात्र को विश्वविद्यालय प्रशासन ने निलंबित कर दिया है। साथ ही उसका छात्रावास व परिसर में प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है। छात्र से तीन दिन में अपना स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। इससे संतुष्ट न होने पर उसे विवि से निष्कासित किया जा सकता है।
प्रॉक्टर प्रो. दिनेश कुमार की अध्यक्षता में सोमवार को प्रॉक्टोरियल बोर्ड की बैठक हुई, जिसमें उक्त मामले में पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारी की सूचना की जानकारी दी गई। इस क्रम में बीए फाइनल ईयर के छात्र आदित्य सिंह का परिसर में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया।
विभाग में पेपर प्रेजेंटेशन व विभागीय सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप में उक्त छात्र ने दूसरे नंबर से अश्लील मेसेज व वीडियो भेजे थे। ऐसा एक नहीं दो बार किया। इतना ही नहीं उसने प्राचीन इतिहास व हिंदी के शिक्षकों व छात्रों का एक ग्रुप बनाकर भी इस तरह की अभद्रता की थी। जिस पर प्रॉक्टर की ओर से पुलिस प्रशासन को तहरीर दी गई थी। पुलिस ने उक्त छात्र को गिरफ्तार कर लिया है।
धार्मिक टिप्पणी मामले की जांच को पांच सदस्यीय समिति
प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने एमए राजनीति विज्ञान सेकेंड सेमेस्टर के विद्यार्थियों के व्हाट्सएप ग्रुप में धार्मिक व जातीय टिप्पणी मामले का भी संज्ञान लिया और इस पर चर्चा की। इस मामले को भी काफी गंभीर और विवि का माहौल बिगाड़ने का प्रयास करने वाला माना। जिस पर कार्रवाई शुरू हो गई है।
प्रॉक्टर प्रो. दिनेश कुमार ने बताया कि इस मामले की जांच के लिए प्रॉक्टोरियल बोर्ड के पांच सदस्यों की एक कमेटी का गठन किया गया है। जिसमें प्रो. एके लाल, डॉ. अरुण कुमार, डॉ. महेंद्र कुमार, डॉ. कमर इकबाल, डॉ. मनीषा शामिल हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ऐसे किसी भी मामले में सख्त कार्रवाई करेगी। बता दें कि उक्त वाट्सअप ग्रुप में राजनीति पर चल रही चर्चा के बीच छात्र आपस में धार्मिक व जातीय टिप्पणी करने लगे थे। जिसकी शिकायत कुलपति, पुलिस व प्रॉक्टर से हुई थी।
काफी छात्रों ने छोड़ा व्हाट्सएप ग्रुप
विभागीय सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एमए राजनीति विज्ञान के छात्रों द्वारा बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप पर जातीय व धार्मिक टिप्पणी का असर दिखा है। पिछले दो दिनों में काफी छात्रों ने इस ग्रुप को छोड़ दिया है। उनका कहना है कि किसी विवाद में पड़ने से अच्छा है कि ग्रुप से बाहर हो जाएं। ऐसे में विभागीय सूचनाओं के आदान-प्रदान में भी दिक्कत हो रही है। हालांकि विवि प्रशासन ने इस तरह के ग्रुप को लेकर कोई खास निर्देश नहीं जारी किया है।