कमर दर्द पांच दिन से ज्यादा रहे और हाथ-पैर सुन्न हो जाए या झंझनाटह महसूस होती रहे तो डॉक्टर को दिखाएं। यह रीढ़ की दिक्कत हो सकती है। स्पाइन में किसी तरह की दिक्कत है तो मिनिमली इन्वेसिव स्पाइन सर्जरी (दूरबीन) से ऑपरेशन किया जाता है।
यह बात नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज जबलपुर के न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. वाईआर यादव ने कही। वह शुक्रवार को पीजीआई में आयोजित स्पाइन सर्जरी कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
डॉ. यादव ने बताया कि दूरबीन तकनीक से स्लिप डिस्क की परेशानी तीन से चार दिन में दूर हो सकती जाती है।
न्यूरो सर्जरी के कुल मामलों में से 50 फीसदी से ज्यादा स्पाइन सर्जरी के केस आ रहे हैं। इस दौरान चार मरीजों के रीढ़ की हड्डी में स्लिप डिस्क और गर्दन के पास डिस्क में होने वाली परेशानी की दूरबीन तकनीक से सर्जरी की गई और उसका प्रजेंटेशन किया गया। कार्यशाला में कोरिया के डॉ. कैगं टीकलीन, नई दिल्ली के डॉ. सत्यनाम छाबड़ा ने भी अपने अनुभव बताए।
नस को दबाने वाले हिस्से की करते हैं सर्जरी
डॉ अवधेश जायसवाल और डॉ वाईआर यादव
- फोटो : amar ujala
डॉ. वाईआर यादव ने बताया कि हाथ-पैर में कमजोरी, दर्द बना रहना और सुन्नता की वजह रीढ़ की हड्डी में कुशन का काम करने वाली डिस्क के प्रभावित होने का संकेत है। दूबीन तकनीक में जितना डिस्क अपने स्थान से बाहर निकल कर नस को दबा रहा है, उसे निकाल दिया जाता है।
वहीं पीजीआई के डॉ. अवधेश जायसवाल ने बताया कि दूरबीन तकनीक में एक इंच के चीरे में माइक्रोस्कोप के जरिये नसों पर दबाव बनाने वाले हिस्से पर पहुंचते हैं। उस डिस्क या हड्डी को कम देते हैं। इसकी सफलता की दरें 95 फीसदी है।
10 फीसदी में ही सर्जरी की जरूरत
डॉ जय सरदारा
- फोटो : amar ujala
पीजीआई के डॉ. जय सरदारा ने बताया कि रीढ ही हड्डी में स्लीप डिस्क होने पर 90 फीसदी मरीजों में दर्द से राहत दवा और फिजियोथिरेपी से मिल जाती है। सिर्फ 10 फीसदी में सर्जरी की जरूरत पड़ती है। डिस्क के लगातार बढ़ते रहने पर सर्जरी की जरूरत पड़ती है।
कैसे बचाएं स्पाइन
- वजन कम रखें। व्यायाम करते रहें।
- पौष्टिक चीजें खाना बंद न करें। खासतौर से कैल्शियम।
- शराब व धूम्रपान से बचें।
- भारी चीजें झटके से न उठाएं।
- गड्ढे वाली सड़कों पर धीमी गति से वाहन चलाएं।
- उठते और बैठते समय ध्यान रखें कि रीढ़ पर ज्यादा दबाव तो नहीं है।
- ज्यादा देर तक बैठकर काम करना है तो हर आधे घंटे में एक बार खड़ा हो जाएं।
- दो चार मिनट टलहने के बाद सीट पर बैठें।