शिवपाल भले चुनावी चौसर के महारथी माने जाते हैं, लेकिन उनकी पार्टी के लिए यह पहला चुनाव है। इस चुनाव से उनके बेटे आदित्य यादव का सियासी भविष्य भी जुड़ा है। क्योंकि करीब छह माह से शिवपाल पर्दे के पीछे नजर आते हैं और आदित्य फ्रंटफुट पर।
शिवपाल के खास सिपहसलारों की भी ख्वाहिश है कि नए नेतृत्व के रूप में आदित्य आगे बढ़ें। यही वजह है कि उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारिणी में महासचिव जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। मथुरा से निकलने वाली रथयात्रा का नेतृत्व भी उन्हें सौंपा गया है।