मानकों की अनदेखी पर काली सूची में डाले गए लखनऊ के एक मेडिकल कॉलेज का केस रफा-दफा कराने के मामले में हाईकोर्ट के पूर्व जज समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है। उड़ीसा हाईकोर्ट के पूर्व जज इसरत मसरूर कुद्दुसी, प्रसाद एजुकेशनल ट्रस्ट के बीपी यादव एवं पलाश यादव, भुवनेश्वर के बिचौलिए विश्वनाथ अग्रवाल, हवाला ऑपरेटर रामदेव सारस्वत और भावना पांडे को जांच एजेंसी ने बृहस्पतिवार को अदालत में पेश किया। जहां से सभी को चार दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया गया। सभी से सीबीआई मुख्यालय में पूछताछ की जाएगी।
सीबीआई ने बृहस्पतिवार को पूर्व जज कुद्दूसी के लखनऊ में हजरतगंज स्थित आवास पर लगातार दूसरे दिन ओर फैजाबाद में भी छापा मारा। साथ ही बीपी यादव और पलाश यादव के ठिकानों से कुछ पेपर सीबीआई अपने साथ ले गई है। जांच एजेंसी ने बुधवार को दिल्ली, लखनऊ व भुवनेश्वर समेत नौ स्थानों पर तलाशी और छापेमारी की कार्रवाई की।
एजेंसी ने इस डील के लिए दिल्ली के चांदनी चौकी के हवाला ऑपरेटर के यहां से ले जाए जा रहे एक करोड़ रुपये भी बरामद किए थे।
आरोपियों के बीच हुई 88 कॉल
सीबीआई का दावा है कि मामले में आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सुबूत हैं। कोर्ट में सीबीआई ने बताया कि आरोपियों के के बीच 88 कॉल हुई हैं। बतौर सुबूत कॉल रिकॉर्ड की डिटेल भी कोर्ट में पेश की गई। एजेंसी ने बताया कि हवाला कारोबारी के जरिए केस में पैसे का लेनदेन हुआ।