सीतापुर में जिला पंचायत सदस्यों का चुनाव राजनीतिक दलों के लिए खासा निराशाजनक रहा। चुनाव से पहले बड़े-बड़े दावे करने वाले राजीनितक दल बामुश्किल दहाई के आंकड़े तक पहुंच पाए। चुनाव में दिग्गजों के परिवारीजनों को हार का मुह भी देखना पड़ा। कुल ७९ सदस्यों में से जिला पंचायत अध्यक्ष चुने जाने के लिए ४० वोट चाहिए, इस जादुई आंकड़े को कोई भी दल नहीं छू पाया है। निर्दलीय ३९ सदस्यों ने जीत दर्ज करके सत्ता की चाबी कब्जे में कर ली है। निर्दलीय सदस्यों को अपने-अपने पाले में लाने के लिए भाजपा और सपा में घमासान चल रहा है।
इस बार पंचायत चुनाव में भाजपा के साथ सपा, बीएसपी और कांग्रेस ने पूरी तकात के साथ चुनाव लड़ा था। हालांकि, परिणाम आने पर राजनीतिक दलों को निराशा ही हाथ लगी। ३९ सीटों पर कब्जा करके निर्दलीयों ने सत्ता की चाभी अपने कब्जे में कर ली है। भाजपा को १४, सपा को १३ और बसपा को ७ ही सीट मिलीं। कांग्रेस का खाता ही नहीं खुल सका। भाजपा के मछरेहटा, महोली, हरगांव व लहरपुर विधायक अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों से एक भी जिला पंचायत सदस्य नहीं जिता सके।
वहीं मछरेटा विधायक के तीन परिवारजनों को चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा। हालांकि, सपा के दिग्गजों का प्रदर्शन बेहतर रहा। महमूदाबाद के विधायक नरेद्र वर्मा अपनी भाभी को, जिलाध्यक्ष छत्रपाल यादव पत्नी को और पूर्व मंत्री रामपाल राजवंशी बहू को चुनाव जिताने में कामयाब रहे। अब भाजपा और सपा की नजर जिला पंचायत अध्यक्षी पर है। ऐसे में दोनों में घमासान चल रहा है। भाजपा और सपा के नेता निर्दलीय उम्मीदवारों को अपने-अपने पाले में लाने के लिए पुरजोर कोशिश कर रहे हैं।