लकड़ी पर लगने वाली पांच फीसदी जीएसटी हजम करने के लिए राजधानी एवं आसपास के प्लाईवुड प्रोडक्शन सिंडीकेट का बड़ा खेल सामने आया है।
सिंडीकेट ने एक बिचौलिए के नाम पेंट्स, वार्निश के नाम पर फर्म का पंजीयन कराया और 6.83 करोड़ रुपये की लकड़ी खरीद ली। बाद में लकड़ी खरीद के 921 ई-वे बिल को निरस्त कर दिया गया।
फर्म मालिक बताने को तैयार नहीं है कि खरीदी गई लकड़ी किसे बेची गई। सीतापुर सचल दल प्रभारी अनिल कुमार ने 17 अगस्त को लकड़ी लदे ट्रक का रोक कर जांच की तो मामला गड़बड़ मिला। प्रभारी की रिपोर्ट पर लखनऊ और सीतापुर की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) की टीम ने जांच की तो खेल सामने आया।
कारोबारी को नोटिस
डिप्टी कमिश्नर दिनेश पाल के अनुसार, सीतापुर स्थित तंबौर के कारोबारी करार खान ने फर्म का पंजीयन पेंट्स वार्निश के नाम पर कराया था। मगर, जब लकड़ी से भरे ट्रक को रोककर जांच की गई तो पता चला कि वह लकड़ी का कारोबार कर रहा है। लकड़ी पर पांच फीसदी जीएसटी हैै। करार खान को नोटिस जारी किया गया।
1.24 करोड़ की टैक्स चोरी पकड़ी
ज्वॉइंट कमिश्नर संत कुमार जैन के मुताबिक, फर्म केएम इंटरप्राइजेज तंबौर सीतापुर के पते पर जांच की गई तो लकड़ी की खरीद-फरोख्त संबंधी 40 लूज पर्चे भी पकड़े गए। निरस्त बिल एवं लूज पर्चे के आधार पर करीब 1.24 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी का खुलासा हुआ।
56.40 लाख की जीएसटी चोरी वसूली
सचल दल ने सुपारी एवं तंबाकू पर हो रही 56.40 लाख रुपये की जीएसटी चोरी की वसूली की है। इसमें सुपारी की 36.33 एवं पान मसाला की 20.11 लाख रुपये की रकम शामिल है। गुवाहाटी की एक फर्म के द्वारा जीएसटी चोरी कर सुपारी कानपुर भेजी जा रही थी। जबकि पान मसाला दिल्ली से दीमापुर जाने के दौरान सुल्तानपुर रोड पर ट्रक को पकड़ा था।
लखनऊ सहित आसपास के प्लाईवुड सिंडीकेट ने बिचौलिए को कारोबारी बनाया। इसके बाद फर्म का पंजीयन कराया और लकड़ी खरीद कर उसके ई-वे बिल को नियोजित तरीके से निरस्त करा दिया। ताकि लकड़ी खरीदार का पता न चल सके। बिचौलिए ने खरीदारोें के नाम नहीं बताए तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी जाएगी।
- भूपेंद्र शुक्ला, एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-दो (एसआईबी) लखनऊ जोन