लखनऊ। चार साल में 35 से 40 बार कंधा खिसकने से परेशान एक युवा की मुश्किल आखिरकार आधुनिक सर्जरी ने आसान कर दी। बार-बार कंधा उतरने और जोड़ की हड्डी को नुकसान पहुंचने से युवक की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही थी। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के ऑर्थोपेडिक्स विभाग की टीम ने अत्याधुनिक आर्थ्रोस्कोपिक बोन ब्लॉक सर्क्लाज तकनीक से सर्जरी कर कंधे को दोबारा मजबूती और स्थिरता दी।
मरीज जब संस्थान पहुंचा तो जांच और इमेजिंग में कंधे के जोड़ में गंभीर अस्थिरता के साथ हड्डी की संरचना को भी नुकसान पाया गया। डॉक्टरों के सामने चुनौती कंधे को इस तरह स्थिर करने की थी कि भविष्य में उसके बार-बार खिसकने की आशंका कम हो सके।
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ऑर्थोपेडिक्स विभाग की टीम ने प्रो. डॉ. पंकज अग्रवाल के नेतृत्व में आर्थ्रोस्कोपिक बोन ब्लॉक सर्क्लाज तकनीक से सर्जरी की। इसमें बड़े चीरे के बजाय छोटे चीरे के माध्यम से कैमरे और विशेष उपकरणों की मदद से कंधे के जोड़ का उपचार किया गया। हड्डी के हिस्से को सही स्थान पर लगाकर कंधे के जोड़ को मजबूती दी गई। सर्जरी के बाद मरीज की हालत संतोषजनक बताई गई है। उसे कंधे की सुरक्षा के साथ फिजियोथेरेपी अपनाने की सलाह दी गई है।
ऑर्थोपेडिक्स विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. दीपक कुमार ने बताया कि जिन मरीजों का कंधा बार-बार खिसकता है और जोड़ की हड्डी को नुकसान पहुंच चुका होता है, उनके लिए यह तकनीक उपयोगी हो सकती है। सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया का प्रबंधन डॉ. निधि, डॉ. पीके दास और एनेस्थीसिया विभाग की टीम ने संभाला।