शूटर विजय यादव के बयान पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। बयानों की पुष्टि की शुरुआती जांच में कई विरोधाभास सामने आए हैं। दरअसल लखनऊ जिला जेल में वर्तमान में आतिफ नाम के चार बंदी/कैदी बंद हैं। इनमें से किसी के भाई का नाम असलम नहीं है। न ही संजीव व किसी आतिफ का विवाद सामने आया। इस वजह से विजय के बयान पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर ये किस असलम और आतिफ की बात कर रहा है। कहीं ऐसा तो नहीं साजिश के तहत ही ये बयान दिया गया है।
विजय यादव ने दावा किया है कि असलम नाम के शख्स ने सुपारी थी। उसका भाई आतिफ लखनऊ जेल में बंद है। जेल सूत्रों के मुताबिक वर्तमान में लखनऊ जेल में चार आतिफ बंद हैं। इसमें से दो कानपुर व एक-एक महाराष्ट्र और गाजीपुर का रहने वाला है। जब विजय का बयान आया तब जेल प्रशासन ने अपने स्तर से इस बारे में तहकीकात की, जिसके बाद ये जानकारी सामने आई। अब सवाल है कि क्या विजय ने फर्जी कहानी गढ़ी है। अगर ऐसा है तो क्यों? आशंका है कि जो उसका आका है उसी ने इस तरह की कहानी उसको बयां करने का हुक्म दिया था। इसलिए वह रटारटाया जवाब दे रहा है। फिलहाल जांच टीमें इस तथ्य के सत्यापन करने में जुटी है।
आखिर विवाद कैसे संभव है
संजीव जेल की हाई सिक्योरिटी बैरक में रहता था। ऐसे में उसका किसी से विवाद होना कैसे संभव है। विजय ने दावा किया कि असलम ने उसको बताया कि संजीव ने उसके भाई आतिफ की दाढ़ी नोची थी। इसलिए बदला लेना है। ये बात गले नहीं उतर रही है। वहीं सूत्रों के मुताबिक वह बिल्कुल भी अकेला रहता था। जेल में बंद कोई भी कैदी व बंदी उसका करीबी नहीं था। जेल प्रशासन की जानकारी में भी कोई वाद विवाद सामने नहीं आया। अगर ऐसा हुआ होता तो जानकारी होती।
हर वक्त सीसीटीवी कैमरे के निगरानी में था
संजीव की बैरक व उसके आसपास का पूरा एरिया सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में था। वह खूंखार गैंगस्टर की सूची में टॉप पर था। इसलिए जेल प्रशासन उसकी हर वक्त निगरानी करता था। अगर संजीव का किसी आतिफ से विवाद होता तो कैमरे में जरूर कैद होता। अभी तक ऐसा कोई भी फुटेज नहीं मिला है। तब भी गहनता से तहकीकात की जा रही है।