संजय निषाद की राजनीति का आधार निषाद समाज के वोटों की ताकत है। इसी ताकत के बदले वह सत्ता में भागीदारी की मांग करते रहते हैं। प्रदेश की करीब 160 सीटों पर निषाद और उनकी उपजातियों की संख्या इतनी है कि वह चुनाव परिणाम का रुख बदल सकते हैं। खासतौर पर पूर्वी यूपी के करीब 22 जिलों से संबंधित लोकसभा व विधानसभा सीटों पर निषाद, केवट, मल्लाह, सैनी, बेलदार और बिंद बिरादरी का अच्छा प्रभाव है।