जिले में सीता झील वजूद में आने से पहले ही अवैध प्रापर्टी डीलर व राजस्व की मिलीभगत की भेंट चढ़ चुकी है। भूमि के 33 हेक्टेअर भूमि को भूमिधरी में दर्ज कर बड़ा खेल खेला गया है। राजस्व अभिलेखों के अनुसार भूमि संख्या 1359 में फसली दर्ज थी लेकिन वर्ष 2005 के बाद में अवैध रूप से 33 हेक्टेअर भूमि को भूमिधरी दर्ज की गई है। इसमें अवैध प्रापर्टी डीलरों ने अवैध रूप से जमीन की खरीद-फरोख्त की है।
रामनगरी में पर्यटन के विकास को बढ़ावा देने के लिए सीता झील का निर्माण कराए जाने के लिए सर्वे कार्य हुआ है। चौदह कोसी परिक्रमा मार्ग के समानान्तर सीता झील बनाए जाने का खाका सरयू नहर परियोजना ने खींचा है। अफीम कोठी से ब्रह्मकुंड गुरुद्वारा-अयोध्या तक झील बनेगी। इसी के साथ उसके लिए चयनित जमीन पर कराए गए स्थायी निर्माण खतरे की जद में आ गए हैं।
अधिशासी अभियंता (सरयू नहर) जय सिंह के अनुसार प्रस्तावित सीता झील की अंतरिम आख्या संबंधित कमेटी को वह सौंप चुके हैं। सूत्रों के अनुसार यह चार किलोमीटर लंबी एवं पांच सौ मीटर चौड़ी होगी। सीता झील के वास्ते सर्वे में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। अयोध्या-फैजाबाद विकास प्राधिकरण की बगैर अनुमति के उस पर स्थायी निर्माण मिले हैं।