किसानों से सस्ती जमीन खरीदी, फिर महंगे प्लॉट और फ्लैट बेचकर मोटी कमाई की। पर जब बात गरीबों और आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों को आशियाना देने की बात आई तो कोताही बरतने लगे। सिर्फ एपीआई अंसल ही नहीं, राजधानी में दूसरी रियल एस्टेट कंपनियां का भी यही हाल है।
जबकि प्रदेश की आवास नीति के तहत इंटीग्रेटेड और हाइटेक टाउनशिप में 20 फीसदी एलआईजी और ईडब्ल्यूएस आवास देना अनिवार्य हैं। इसके बावजूद कंपनियों की कार्रवाई आवंटन व पंजीकरण तक सीमित है। स्थिति यह है कि इन कंपनियों ने 12 हजार से अधिक गरीब आवासों में से 200 पर भी कब्जा नहीं दिया है।
इस मामले में हाईकोर्ट सख्त है, लेकिन वास्तविकता यह है कि कोई भी कंपनी एक साल से पहले गरीब आवासों पर कब्जा दे पाने की स्थिति में बिल्कुल नहीं है।
एपीआई अंसल ने कुछ फ्लैटों पर कब्जे दिए हैं और बाकी बनाने का दावा किया है। ऐसा ही हाल दूसरी कंपनियों का है। किसी ने अभी पंजीकरण नहीं शुरू किया है तो कोई आवंटन ही कर रहा है। जबकि सभी को निर्माण पूरा करने में डेढ़ से दो साल लगेंगे।
जिन कंपनियों को लाइसेंस मिले छह से सात हो चुका है, वे भी गरीब आवास पर कब्जा नहीं दे पा रही हैं। वहीं, एपीआई अंसल की टाउनशिप में दो साल पहले 38 निर्मित फ्लैटों के आवंटियों को मुख्यमंत्री ने चाबी सौंपी थी। मगर कंपनी ने करीब 4000 फ्लैट में से कुछ सौ फ्लैटों पर ही आवंटियों को कब्जा दिया है। इसके आगे कुछ भी नहीं किया जा रहा है। इसी को लेकर हाईकोर्ट ने भी अपनी नाराजगी व्यक्त की है।
डीएलएफ के भी 1264 फ्लैट का पंजीकरण नहीं
आवास विकास परिषद की 2500 एकड़ वाली हाइटेक टाउनशिप डीएलएफ में गरीब आवासों के आवंटन की प्रक्रिया अब तक नहीं शुरू हुई है। पांच साल पहले परिषद ने रायबरेली रोड स्थित गार्डन सिटी के लिए डीएलएफ को लाइसेंस दिया था। यहां 1264 ईडब्ल्यूएस और एलआईजी भवनों का अब तक कुछ पता नहीं है।
परिषद की पिछली बोर्ड मीटिंग में डीएलएफ का प्रस्ताव खारिज कर दिया गया है। दरअसल सब्सिडी पर दिए जाने वाले आवासों की लागत कम और खर्च अधिक होता है। ऐसे में डीएलएफ चाहता है कि उससे सेंटेज व लागत लेकर एजेंसी ही ये गरीब आवास बना दे। मगर 6.875 फीसदी सेंटेज को लेकर बोर्ड राजी नहीं हुआ। अपर आवास आयुक्त रुद्र प्रताप सिंह ने बताया कि डीएलएफ को ये गरीब आवास खुद ही बनाने होंगे।
एपीआई अंसल के एवीपी अतुल सक्सेना ने बताया कि ईडब्ल्यूएस और एलआईजी भवनों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। इनमें बहुत जल्द ही आवंटियों को कब्जा भी दे देंगे। ओमैक्स अगले महीने से करीब 250 भवनों का पंजीकरण और आवंटन शुरू कर देगा। जबकि, डेढ़ साल में इनका निर्माण पूरा किया जाएगा। ईमार एमजीएफ ने हाल ही में 146 ईडब्ल्यूएस आवासों का पंजीकरण शुरू किया है। एल्डिको ने भी हाल ही में अपने सभी ईडब्ल्यूएस, एलआईजी भवनों का आवंटन कर दिया है। आईआईएम रोड की एल्डिको सिटी में निर्माण जारी है।
कंपनियों को इस बारे में न सिर्फ कड़े पत्र जारी कर दिए गए हैं, बल्कि शासन को भी वर्तमान स्थिति से भी अवगत करा दिया गया है। ईडब्ल्यूएस और एलआईजी भवनों के निर्माण और आवंटन में देरी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसा करने वाली कंपनियों पर कड़ा एक्शन लिया जाएगा।
- सत्येंद्र कुमार सिंह, उपाध्यक्ष, एलडीए