सियासत बांटती है। ऐसा कहते हुए आपने कई लोगों को सुना होगा। पर, पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्व. रामलाल राही के दोनों बेटों- हरगांव विधायक सुरेश राही और पूर्व विधायक रमेश राही के बीच पंचायत चुनाव में जो दीवार खड़ी हुई थी, विधानसभा चुनाव के बिसात पर आते ही ढह गई। दोनों गिले-शिकवे भुलाकर एक हो गए।
करीब छह माह पहले की बात है। पंचायत चुनाव के दौरान ब्लॉक में विधायक सुरेश राही और उनके बड़े भाई पूर्व विधायक रमेश राही के बीच विवाद हो गया था। कहासुनी के बाद मामला तूल पकड़ गया। इससे दोनों के रिश्तों में ऐसी दरार पड़ी कि शहर के जेल रोड स्थित राही के आंगन में दीवार खड़ी हो गई। सुरेश राही हरगांव से भाजपा विधायक हैं। इस बार भी पार्टी ने उन पर दांव लगाया है। वहीं, पूर्व विधायक रमेश राही भी इस बार सपा से हरगांव सीट से टिकट मांग रहे थे। रमेश ने पूरी ताकत भी लगाई।
ऐन वक्त पर पार्टी ने चुनाव से पहले भाजपा छोड़कर सपा में आए पूर्व मंत्री रामहेत भारती को टिकट दे दिया। टिकट क्या कटा, मन की गांठें खुल गईं। इसी के बाद दोनों भाई एक हो गए। अगर रमेश राही को सपा से टिकट मिलता तो वे अपने भाई सुरेश राही के सामने चुनावी दंगल में ताल जरूर ठोकते। एक होने के सवाल पर रमेश राही कहते हैं, बाबू जी के मित्रों को भाई-भाई का विवाद अच्छा नहीं लग रहा था। उन लोगों ने एक करने के प्रयास किए और हम लोग विवाद खत्म कर एक हो गए।