रामजन्म भूमि परिसर में चल रहा राम मंदिर निर्माण कार्य
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राममंदिर की नींव के दूसरे चरण के तहत 50 फीट गहरी नींव को मजबूती प्रदान करने के लिए 30 ब्लॉकों में रॉफ्ट की ढलाई पूरी हो चुकी है। अब करीब एक माह बाद ब्लॉक की शटरिंग खोली जाएगी। इसके बाद फरवरी माह से प्लिंथ निर्माण का काम शुरू होगा। इसके लिए ग्रेनाइट पत्थरों की आपूर्ति शुरू हो गई है।
राममंदिर के तीसरे चरण के तहत 14 मीटर की नींव पर प्लिंथ का निर्माण होना है। जो करीब 16 फीट ऊंचा होगा। प्लिंथ में मिर्जापुर के ग्रेनाइट के 30 हजार घनफिट पत्थर लगेंगे। बताया गया कि ग्रेनाइट पत्थर पानी को सोखने में ज्यादा प्रभावी होते हैं। इसलिए राममंदिर की नींव को रिसाव से बचाने के लिए प्लिंथ में ग्रेनाइट पत्थरों का इस्तेमाल किया जाएगा। नींव की तरह ही प्लिंथ में भी कहीं भी लोहे का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इंजीनियरिंग फिल्ड प्रणाली से ही प्लिंथ के पत्थरों को भी जोड़ने का काम इंजीनियर करेंगे।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य डॉ.अनिल मिश्र ने बताया कि राममंदिर के दूसरे चरण के तहत चल रहे रॉफ्ट का काम समाप्त हो चुका है। 30 ब्लॉकों में ढाली गई रॉफ्ट की शटरिंग अब करीब एक माह बाद इंजीनियरों के दिशा-निर्देशन में ही खोली जाएगी। बताया कि संभावना है कि फरवरी माह से राममंदिर के 16 फिट ऊंचे प्लिंथ निर्माण का काम प्रारंभ कर दिया जाएगा।
मकराना के संगमरमर से बनेगी राममंदिर की चौखट
राममंदिर की नींव में कुल चार प्रकार के पत्थरों का इस्तेमाल किया जाना है। प्लिंथ को ऊंचा करने में जहां कर्नाटक का ग्रेनाइट व मिर्जापुर का सिलेटी पत्थर इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं राजस्थान के वंशीपहाड़पुर के गुलाबी पत्थरों से मुख्य मंदिर तैयार होगा। इसी तरह परकोटा में जोधपुर के पत्थरों का इस्तेमाल किया जाएगा। मंदिर की चौखट मकराना के संगमरमर से बनाई जाएगी। पत्थरों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय सहित अन्य सदस्यों की एक टीम 14 दिसंबर को ही राजस्थान जाने वाली थी लेकिन आठ राज्यों के मुख्यमंत्रियों के आगमन को देखते हुए फिलहाल ट्रस्ट ने यह यात्रा स्थगित कर दी है। शीघ्र ही यह टीम पत्थरों की आपूर्ति सुनिश्चित कराने के लिए राजस्थान रवाना होगी।