उन्होंने लिखा है कि असंतुष्ट होने पर कर्मचारियों की परिवीक्षा अवधि एक वर्ष बढ़ाई जा सकती है, पर वार्षिक वेतनवृद्धि और स्थायीकरण पर रोक नहीं लगाई जा सकती। उन्होंने आदेश को वापस लेने की मांग की है। दोनों संगठनों ने तर्क दिया है कि वार्षिक वेतन वृद्धि पर रोक लगाना सहकारी सेवा नियमावली 1975 के नियम 84 (1) बी के अंतर्गत वृहद दंड है।
अभी जांच पूरी नहीं हुई है और यह भी नहीं तय हुआ कि किसकी नियुक्ति गलत तरीके से की गई है, तब इस तरह का दंड अनुचित तथा प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध है। दोनों संगठनों ने दावा किया कि वेतनवृद्धि और स्थायीकरण पर रोक लगाने का आदेश प्रबंध निदेशकों की तरफ से दिया जा रहा है। सरकार ने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया है।