प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में आज कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की गर्जना सुनने को मिलेगी। यह यूपी में उनके चुनाव अभियान की शुरुआत भी है। कांग्रेस की कोशिश है कि पूर्वांचल में भी नए कृषि कानून सशक्त मुद्दा बने। मोदी के गढ़ में शक्ति प्रदर्शन कर कांग्रेस देश-प्रदेश में यह संदेश देना चाहती है कि उसे कमजोर न समझा जाए।
कांग्रेस के रणनीतिकार स्वीकार करते हैं कि वाराणसी की रैली में कृषि कानून फोकस में रहेंगे। लखीमपुर की घटना को भी इसी से जोड़कर जनता के सामने रखा जाएगा। लखीमपुर की घटना भले ही मोदी-योगी सरकार के खिलाफ समग्र तौर पर आक्रोश की वजह न बन पाई हो, पर केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय कुमार मिश्रा ‘टेनी’ और उनके पुत्र के खिलाफ ताप जरूर महसूस किया जा रहा है। यही कारण है कि कांग्रेस ने रैली में टेनी की बर्खास्तगी की मांग प्रमुखता से उठाने का फैसला किया है।
चुनाव के लिहाज से कांग्रेस वाराणसी में अच्छा प्रदर्शन करती रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेता अजय राय और राजेश मिश्रा वहां से कई बार विधायक-सांसद रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी के अनिल कुमार श्रीवास्तव ने मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई थी। कुल मिलाकर सांगठनिक लिहाज से भी कांग्रेस वाराणसी में अपेक्षाकृत मजबूत है। कांग्रेस का दावा है कि रविवार को होने वाली रैली में पूर्वांचल के प्रत्येक न्याय पंचायत के लोगों का प्रतिनिधित्व होगा। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव बाजीराव खाडे बताते हैं कि इस रैली से पार्टी पूर्वांचल के किसानों को भी कृषि कानूनों की खामियां बताते हुए जागरूक करेगी। उन्होंने रैली में एक लाख से ज्यादा लोगों के जुटने का दावा करते हुए कहा कि यह किराए के लोगों की नहीं, बल्कि कांग्रेस से दिल से जुड़े लोगों की रैली होगी।
यूं ही नहीं चुना वाराणसी
प्रियंका ने अपने चुनावी अभियान के श्रीगणेश के लिए वाराणसी को यूं ही नहीं चुना है। वाराणसी जहां पीएम का चुनाव क्षेत्र होने से अहम है, वहीं पूर्वांचल के जिलों का केंद्र भी माना जाता है। काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित महादेव हर हिंदू के दिल में बसे हैं। प्रियंका रविवार को वहां पूजा-अर्चना करके भी आम मतदाताओं को बिन बोले खास संदेश देंगी कि आरएसएस से असहमत लोगों के दिल में भी बाबा नीलकंठ रचे-बसे हैं।