प्रदेश में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लाभार्थियों को किडनी एवं कार्निया प्रत्यारोपण की सुविधा देने की तैयारी है। स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रेहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीस) के इस प्रस्ताव को प्रदेश सरकार ने मंजूरी दे दी है। इसे अंतिम मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजा गया है।
साचीस की मुख्य कार्यपालक संगीता सिंह ने यह जानकारी बृहस्पतिवार को आयुष्मान योजना के तीन साल पूरे होने पर आयोजित कार्यशाला में दी। उन्होंने बताया कि नए प्रस्ताव में गंभीर बीमारियों को शामिल किया गया है। योजना में पांच लाख तक का इलाज मिलता है। सरकारी चिकित्सा संस्थानों में किडनी प्रत्यारोपण में इससे कम खर्च आ रहा है। ऐसे में पैकेज की संख्या बढ़ाकर इसे शामिल किया जा सकता है। योजना में अभी तक 1,393 पैकेज शामिल हैं। इसके तहत कैंसर सर्जरी, रेडियोथेरैपी, कीमोथेरेपी, हृदय संबंधी सर्जरी, रीढ़ की सर्जरी, दांतों, आंखों की सर्जरी आदि शामिल हैं।
आयुष्मान में अब तक 18,502 किडनी रोगियों को मिला उपचार
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना लांच होने के तीन साल पूरे होने पर आयोजित कार्यशाला में स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रेहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीस) की मुख्य कार्यपालक संगीता सिंह ने बताया कि प्रदेश में अब तक कुल 8,58,296 लोगों ने योजना का लाभ मिला है। इसमें 4,89,229 पुरुषों और 3,69,067 महिलाएं शामिल हैं। योजना में सर्वाधिक 53,435 कैंसर मरीजों को लाभांवित किया गया है। इसी प्रकार 18,502 किडनी रोगी, 31,801 हड्डी रोगी, 9,393 हृदय रोगी, 35,731 स्त्री प्रसूति रोगी और 4,699 न्यूरो सर्जरी के रोगियों का उपचार कराया गया है। सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में संयुक्त निदेशक डॉ राजेंद्र कुमार, डॉ बीके पाठक ने भी योजना के बारे में जानकारी दी।
8.43 लाख परिवार है योजना में
प्रदेश में आयुष्मान में 8.43 लाख परिवार शामिल हैं। इसके अलावा 40 लाख अत्योदय राशन कार्ड धारकों और 11.65 लाख श्रमिक परिवारों को शामिल किया गया है। योजना में भर्ती होने के तीन पहले की सभी जांचें डॉक्टर का खर्च, अस्पताल में भर्ती होने के दौरान इलाज व खाने का खर्च, डिस्चार्ज होेने के 15 दिन बाद का चेकअप व दवा का खर्च शामिल किया जाता है। यह सुविधा भर्ती होने पर ही मिलती है।
नवविवाहिता व बच्चों को जोड़ा जा सकेगा
योजना में चयनित परिवारों में 2011 के बाद आई नवविवाहिता और जन्म लेने वाले बच्चों को जोड़ने के लिए एड मेंबर का विकल्प लिया गया है। वैवाहिक पंजीकृत प्रमाण पत्र और जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर दोनों को जोड़ा जा रहा है।