जिन युवाओं ने पिछली सपा सरकार की भर्तियों के फर्जीवाड़े से आजिज आकर कोर्ट-कचहरी से सीबीआई जांच तक की लड़ाई लड़ी, राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष को हटवाया, वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा सरकार लाने के लिए सड़क पर उतरे, वे इस सरकार से भी खुश नहीं हैं। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति प्रयागराज के अध्यक्ष अवनीश पांडेय कहते हैं कि इस सरकार ने भी प्रतियोगियों को निराश ही किया है। निष्पक्ष भर्ती का दावा तभी सही मानें जब चयनित न होने वाले अभ्यर्थी कहें कि भर्ती पारदर्शी व्यवस्था के तहत हुई। जिनका चयन हो गया, वे क्यों अपने जुगाड़ और धंधे की कहानी बताएंगे? बातचीत के प्रमुख अंश....
सवाल- युवाओं का सबसे बड़ा मुद्दा क्या है?
जवाब- बेरोजगारी से जूझ रहे युवाओं को रिक्त पदों पर नौकरी के पूरे अवसर मिले। पारदर्शी तरीके से निष्पक्ष रूप से समान अवसर प्राप्त हो। यह सरकार भी पूरी तरह यह कार्य सुनिश्चित नहीं कर पाई है।
सवाल- सरकार तो निष्पक्ष व पारदर्शी भर्ती के दावे करती है?
जवाब- समूह ‘क’ से लेकर ‘ग’ तक हजारों पद खाली पड़े हैं। माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड केवल पिछली भर्तियों का इंटरव्यू करा पाया, एक भी नई भर्ती कराकर नियुक्ति पत्र नहीं दे सका है। उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग ने नया विज्ञापन जरूर निकाला, लेकिन भर्ती ये भी पूरी नहीं करा पाए। अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से पिछले 2 वर्ष में एक भी नई भर्ती नहीं हुई है। पद खाली होने के बावजूद नौकरी के लिए अवसर न पाने से युवा बहुत निराश हैं। राज्य लोक सेवा आयोग ने नई भर्तियों की ऐसी व्यवस्था बनाई कि युवाओं में आक्रोश भर गया।
सवाल- राज्य लोक सेवा आयोग ने ऐसा क्या किया?
जवाब- सत्ता में आने के बाद योगी सरकार ने राज्य लोक सेवा आयोग में 15 सूत्रीय कार्यक्रम लागू करने की बात कही थी। इसमें समयबद्ध परीक्षा, परीक्षार्थियों को ऑनलाइन कॉपी देखने की व्यवस्था, परीक्षा केंद्र व इंटरव्यू में जैमर, परीक्षा के लिए अच्छे केंद्र बनाने, केवल इंटरव्यू के आधार पर कोई भी परीक्षा न कराने, लिखित व मेरिट के आधार पर चयन कराने जैसी तमाम महत्वपूर्ण बातें शामिल थीं, पर अमल एक पर भी नहीं हुआ। उल्टा अध्यक्ष के रूप में प्रभात कुमार ने पूरी परीक्षा प्रणाली ही बिगाड़ दी। लगता है वह किसी छिपे एजेंडे के साथ आए थे। बिना प्रतियोगियों को बताए अचानक परीक्षा प्रणाली को पलटकर यूपीएससी पैटर्न लागू कर दिया। जो 20% महिला आरक्षण राज्य तक सीमित था, उसे पूरे देश के लिए खोल दिया। पीसीएस से रक्षा अध्ययन, समाज कार्य, अरबी, फारसी व कृषि अभियांत्रिकी जैसे विषयों को बाहर कर दिया। पीसीएस-प्री में पहले 18 गुना अभ्यर्थी क्वालीफाई करते थे। इसे घटाकर 12 गुना कर दिया। इंटरव्यू में पदों के मुकाबले तीन गुना अभ्यर्थी बुलाए जाते थे, उसे दोगुना तक सीमित कर दिया। नतीजा ये हुआ कि यूपी के अभ्यर्थियों के लिए अवसर कम हो गए।
सवाल- प्रतियोगी चाहते क्या हैं?
जवाब- सपा शासनकाल की 600 परीक्षाओं की सीबीआई जांच हो रही है। 13 हजार शिकायतें अभ्यर्थियों ने सीबीआई को दी हैं। लेकिन, 5 वर्ष में केवल दो एफआईआर दर्ज हुई हैं। सीबीआई आयोग के अफसरों व कर्मियों के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति मांग रही है, लेकिन नहीं दी जा रही है। सीबीआई जांच एसआईटी बनाकर करने की मांग के लिए अभ्यर्थी हाईकोर्ट में हैं। राज्य सरकार इसका विरोध कर रही है। जो लोग भ्रष्ट तरीके से चयनित हुए, वे नौकरी कर रहे हैं। सरकारी सिस्टम में रहकर न्याय को विलंबित कर प्रभावित कर रहे हैं। पेपर लीक मामले में जो नकल माफिया पकड़े जाते हैं, वे कुछ ही दिन में छूट जाते हैं और फिर सक्रिय हो जाते हैं। भर्ती में गड़बड़ियां पकड़े जाने पर तत्काल किसी को बलि का बकरा बनाकर मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश रहती है। किसी प्रकरण में जड़ तक कार्रवाई नहीं हुई। लोक सेवा आयोग की परीक्षा नियंत्रक गिरफ्तार हो गईं, लेकिन परीक्षा समिति के अध्यक्ष व अन्य को कुछ नहीं हुआ। टीईटी में परीक्षा नियामक प्राधिकारी गिरफ्तार हो गए, लेकिन आगे की कार्रवाई ठप नजर आने लगी है।
सवाल- समस्याओं के समाधान के लिए कोई सुझाव?
जवाब- सरकार एक युवा आयोग बनाए, जिसे सांविधानिक अधिकार हो। यह युवाओं की समस्याओं की सुनवाई करे। हर शिकायत का 15 दिन में स्पीकिंग ऑर्डर के साथ समाधान सुनिश्चित कराए। इसे सभी सरकारी, गैर सरकारी व सांविधानिक संस्थाओं से शिकायत पर जानकारी प्राप्त करने, जांच करने और दंडित करने का अधिकार दिया जाए।