लखनऊ। खाकी पहनने के बाद हमें बहुत सी जिम्मेदारियां निभानी होती हैं। दायरे में रहकर बहुत से काम करने होते होते हैं और फैसले लेने होते हैं, लेकिन नौकरी से इतर हम एक इंसान हैं और हममें भी उतनी ही संवेदनशीलता है। हम भी सामाजिक परिवार का हिस्सा हैं। इस नाते मैं युवाओं से कहूंगा कि वे अपनी जिम्मेदारी से न भागें। गलत दिखे तो बोलें और कदम उठाएं, हम युवाओं के साथ हैं। ये कहते हुए संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून-व्यवस्था पीयूष मोर्डिया ने मंगलवार को छात्र-छात्राओं से संवाद शुरू किया।
‘आओ, मिलकर रोकें महिला हिंसा’ विषय पर संवाद का आयोजन अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स व आइक्यूएसी सेल लखनऊ पब्लिक कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज की ओर से किया गया था। इस दौरान एक हजार के करीब छात्र-छात्राओं से बतौर मुख्य अतिथि मुखातिब जेसीपी ने कहा कि पुलिस बहुत थोड़ी सी है और समाज के लोगों की संख्या बहुत ज्यादा है। हम तो अपनी ड्यूटी करेंगे ही, पर हमें समाज का, खासकर युवाओं का साथ चाहिए। आपको हमारे सहयोग व मार्गदर्शन की जरूरत होगी तो हम देंगे। मेरी सभी से अपील है कि घर-परिवार हो या स्कूल-कॉलेज, जहां भी रहें अपने कंधों को मजबूत करें, नजरअंदाज करने की आदत छोड़ें और आगे बढ़ें।
महिषासुरमर्दिनी की प्रभावी प्रस्तुति
कार्यक्रम के दौरान कॉलेज की छात्राओं ने महिषासुरमर्दिनी की स्तुति पर एक शानदार नृत्य प्रस्तुत किया और महिला शक्ति द्वारा महिला अपराध खत्म करने का संदेश दिया।
साइबर स्वच्छता व अनुशासन का रखें ध्यान
सोशल मीडिया की दुनिया में प्रवेश करने से पहले साइबर स्वच्छता व अनुशासन का पाठ जरूर पढ़ें। गैजेट चाहे कोई भी हो वह आपकी जरूरत भी है और आपको इस्तेमाल करने का माध्यम भी। सबसे अहम है कि ऑनलाइन दुनिया में किसी भी अजनबी से दोस्ती के खतरों को समझें। साइबर अपराधी की हर हरकत को पकड़ा जा सकता है, इसलिए यदि कभी ऐसे अपराध का शिकार हो जाएं तो घर के बड़ों को जरूर बताएं।
विशाल विक्रम सिंह, एसपी एसटीएफ
हेल्पलाइन की मदद लें, चुप न रहें
181, 1090 या फिर 112 जैसे हेल्पलाइन नंबर सहित कई अन्य सुविधाएं हैं। जरूरत इस बात की है कि चुप्पी तोड़ी जाए। आमतौर पर लोग घटनाओं को अनदेखा कर देते हैं। दूसरे के साथ हो तो उन्हें फर्क नहीं पड़ता और अपने मामले में सामाजिक भय से चुप्पी साध लेते हैं।
डॉ. अर्चना सिंह, एसीपी कैंट
काउंसलिंग से जुड़ें, पीड़िता के दर्द को समझें
दुराचार पीड़िता हो या फिर किसी भी तरह से पीड़ित बच्ची, युवती या महिला, उसे दोष देने से बचें। ट्रॉमा से उसे निकालना बड़ी चुनौती है। यहां मौजूद हर युवा काउंसलर की भूमिका निभा सकता है, इसे कैसे करना है, हम सिखाने को तैयार हैं।
डॉ. संगीता शर्मा, डायरेक्टर, चाइल्ड लाइन लखनऊ
एलपीसीपीएस प्रबंधन ने कहा- हमने लिया संकल्प अब आपकी बारी
हमारे स्कूल-कॉलेज में हमने 80 फीसदी महिला स्टॉफ को स्थान दिया है। हमारी अपील है कि कारपोरेट-नॉनकारपोरेट, निजी क्षेत्रों में महिला स्टाफ की संख्या कम से कम आधी जरूर होनी चाहिए।
हर्षित सिंह, निदेशक
बैड टच के बारे में बच्चों को अवगत कराना जरूरी है। हम लोगों ने स्कूल टीचरों से बात कर उन्हें इसकी जानकारी देने के लिए तैयार किया है। सिर्फ स्कूल कॉलेज ही नहीं घर से लेकर बाजार तक में बच्चियां गुजरें तो उन्हें इसकी जानकारी हो।
गरिमा सिंह, निदेशक
युवाओं के कंधों पर ही बदलाव की जिम्मेदारी है। हमारे कॉलेज के बच्चे इस पहल का हिस्सा बन रहे हैं, यह गर्वान्वित करने वाला पल है। यह कोशिश जारी रहनी चाहिए, बेटियों की सुरक्षा सभी की प्राथमिकता हो
डॉ. एसपी सिंह, संस्थापक महाप्रबंधक
कुछ न कह पाने की हिचक तोड़ने में इस तरह के कार्यक्रम प्रभावी भूमिका अदा करते हैं। कॉलेज परिसर में वरिष्ठ अधिकारियों व विषय विशेषज्ञों की मौजूदगी बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाती है।
डॉ. लक्ष्मी शंकर अवस्थी, डीन