प्रदेश में पॉलिथीन के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाने की कवायद वर्ष 2000 में शुरू हुई थी, लेकिन इस बारे में अलग-अलग अधिनियमों के चलते अब तक इस पर अमल नहीं हो सका है। एक तो नगर विकास विभाग द्वारा वर्ष 2000 में ‘उप्र प्लास्टिक और अन्य जीव अनाशित कूड़ा-कचरा अधिनियम-2000’ लागू किया गया था।
इसके तहत 20 माइक्रॉन से कम की पॉलिथीन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की व्यवस्था है। जबकि पर्यावरण विभाग के 22 दिसंबर 2015 में जारी अधिसूचना में सभी तरह के पॉलीथिन के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। इसी तरह केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की अधिसूचना में अब 50 माइक्रॉन से नीचे वाले पॉलिथीन को पर्यावरण के लिए खतरनाक बताया गया है। अलग-अलग प्रावधानों की वजह से ही पॉलिथीन के प्रयोग पर प्रतिबंध का मामला उलझ गया है।
घट सकता है जुर्माना
पॉलीथिन के प्रयोग पर प्रतिबंध के लिए दिसंबर 2015 में जारी अधिसूचना में छह माह की सजा और एक लाख तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया था। यानी प्रतिबंधित पॉलीथिन का प्रयोग करने वाले व्यक्ति को एक लाख रुपये तक का जुर्माना या छह माह तक की सजा दी जा सकती है। लेकिन अब इस राशि को घटाकर 50 हजार किया जा सकता है। छह माह तक की सजा की अवधि यथावत रखे जाने पर सहमति बनी है।
इस पर नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव मनोज कुमार सिंह का कहना है कि प्रदेश में पॉलीथिन के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाने को लेकर मुख्य सचिव के साथ चर्चा की गई। मगर, यह तय नहीं हो पाया कि किस स्तर पर तक के पॉलिथीन पर रोक लगाई जाए। इस मुद्दे पर सोमवार को फिर से विचार-विमर्श करके ही अंतिम फैसला किया जाएगा।