राजभर ने कहा कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने लोकसभा चुनाव से छह माह पहले प्रदेश में कोटा में कोटा लागू करने की घोषणा करने को कहा था लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ और ना ही ऐसे कोई आसार दिख रहे हैं। अगर भाजपा ने पिछड़ों के लिये आरक्षण में आरक्षण की व्यवस्था नहीं की तो सुभासपा प्रदेश की सभी 80 लोकसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े करेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि वह उत्तर प्रदेश से सटे बिहार के विभिन्न जिलों में भी 16 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह लोकसभा चुनाव की तैयारियों में युद्धस्तर पर जुटे हैं।
राजभर ने कहा कि भाजपा शायद पटेल और यादव मतदाताओं को नाराज नहीं करना चाहती, इसीलिये आरक्षण में आरक्षण की व्यवस्था नहीं कर रही है लेकिन इस तरह वह अन्य पिछड़े वर्गों के 38 प्रतिशत मतदाताओं से हाथ धो बैठेगी। अगर सपा और बसपा का गठबंधन हो जाएगा तो यह 38 प्रतिशत मतदाता इन्हीं दलों में चले जाएंगे और भाजपा के लिये 10 सीटें जीतना भी दूभर हो जाएगा।
इस सवाल पर कि हाल में नयी पार्टी बनाने वाले वरिष्ठ समाजवादी नेता शिवपाल सिंह यादव अगले लोकसभा चुनाव में सपा को कितना नुकसान पहुंचाएंगे, राजभर ने कहा कि भाजपा ने शिवपाल को मायावती का बंगला देकर और जेड प्लस सुरक्षा देकर चूक कर दी।
सपा से जो लोग शिवपाल से जुड़ रहे थे, वे भाजपा सरकार के इस कदम से वापस लौटने लगे। आज यादव बिरादरी के 95 प्रतिशत लोगों ने अखिलेश को अपना नेता मान लिया है। जहां तक दलितों का सवाल है तो वे मायावती के साथ हैं।
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी लोकसभा चुनाव में कुछ प्रमुख मुद्दों के साथ जनता के बीच जाएगी। इनमें देश में सर्वेक्षण कराकर आर्थिक आधार पर सभी जाति के गरीबों को आरक्षण दिये जाने, कोटा में कोटा लागू करने, उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उच्च न्यायालय पीठ गठित करने के मुद्दे अहम हैं।