मोदी, रायबरेली को 1100 करोड़ की विकास योजनाओं की सौगात देने के बहाने गांधी परिवार को न सिर्फ कठघरे में खड़ा करेंगे बल्कि यह बताने की कोशिश करेंगे कि वीवीआईपी संसदीय क्षेत्र होने के बावजूद रायबरेली-अमेठी को विकास के नाम पर कुछ हासिल नहीं हुआ। जैसा विकास होना चाहिए था, वैसा नहीं हुआ। लोगों को रोजगार नहीं मिला। सोनिया व राहुल ने जो वादे किए थे वे पूरे नहीं हुए।
स्मृति ईरानी के माध्यम से भाजपा बीते साढ़े चार साल में जितना अमेठी में सक्रिय दिखी, उतनी रायबरेली संसदीय क्षेत्र में नहीं। पर, लगता है कि भाजपा ने अब रायबरेली पर भी फोकस कर लिया है।
इसीलिए पिछले लोकसभा चुनाव में मोदी ने रायबरेली में भले ही कोई चुनावी सभा नहीं की थी, लेकिन इस बार चुनावी बिगुल फूंकने के लिए रायबरेली को ही चुना है। इसके जरिये वे कांग्रेस के साथ आरपार की सियासी लड़ाई लड़ने का संदेश देंगे। इसके लिए मोदी ने विकास को मुद्दा चुना है।
तीन राज्यों में सत्ता छिनने के बाद भाजपा अब कांग्रेसी दिग्गजों की उनके ही गढ़ों में घेरेबंदी करके 2019 के सियासी समीकरणों को दुरुस्त करने की मुहिम में जुटी है। मोदी का रायबरेली दौरा इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।