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अब कमिशनर-कलेक्टर को नहीं मिलेंगे ठाठ!

Wed, 28 Jan 2015 12:07 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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कमिश्नर, कलेक्टर व अन्य अफसरों द्वारा गांवों में रात्रि निवास के फरमान की अनदेखी को सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है। मुख्य सचिव ने न सिर्फ अफसरों को रात्रि-निवास अनिवार्य रूप से करने की हिदायत दी है बल्कि उनके कामकाज पर सख्त निगरानी के भी संदेश दिए हैं।
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इसके अलावा अधिकारी अब गांवों में रात को तो ठहरेंगे ही, ठाठ भी नहीं बघारेंगे। उन्हें गांवों में उपलब्ध संसाधनों का ही उपयोग कर रात में रुकना होगा। शायद तब वे गांव के लोगों की मुश्किलें ज्यादा समझ पाएंगे।

पिछले दिनों राजस्व परिषद के चेयरमैन जावेद उस्मानी ने जिलों के कामकाज की समीक्षा की तो पता चला कि कमिश्नर व कलेक्टर तय समय पर न तो गांवों के भ्रमण पर जा रहे हैं और न ही रात्रि निवास कर रहे हैं।
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यदि कहीं अफसर गए भी तो ठीक से प्रचार-प्रसार नहीं हो रहा। कई बार वरिष्ठ अधिकारी गांवों में भ्रमण पर गए तो वहां मातहत कर्मचारी ही गायब थे। राजस्व परिषद के चेयरमैन का यह फीडबैक शासन पहुंचा तो मशीनरी सक्रिय हो गई।
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अफसर देंगे क्लीन यूपी-ग्रीन यूपी का संदेश

मुख्य सचिव आलोक रंजन ने समस्त मंडलायुक्तों व जिलाधिकारियों को उनके नकारेपन की विस्तार से जानकारी देते हुए एक सख्त शासनादेश जारी किया है। इसमें अफसरों को बताया गया है कि वे न सिर्फ गांवों में बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार करवाकर रात्रि निवास को जाएंगे बल्कि सांसदों, विधायकों व पंचायत प्रतिनिधियों को पहले से बताना होगा।

गांवों में मिली शिकायतों व समस्याओं का 31 मार्च तक  हरहाल में निराकरण करना होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान की धूम के बीच प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ‘क्लीन यूपी-ग्रीन यूपी’ मिशन का संदेश जमीनी स्तर पर पहुंचाने का काम शुरू कर दिया है।

मुख्य सचिव कमिश्नर और कलेक्टर को खासतौर से हिदायत दी है कि वे गांवों में ठहरने के दौरान मुख्यमंत्री के क्लीन यूपी-ग्रीन यूपी मिशन के अंतर्गत ग्रामीणों को स्वच्छता का संदेश देंगे।
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