कमिश्नर, कलेक्टर व अन्य अफसरों द्वारा गांवों में रात्रि निवास के फरमान की अनदेखी को सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है। मुख्य सचिव ने न सिर्फ अफसरों को रात्रि-निवास अनिवार्य रूप से करने की हिदायत दी है बल्कि उनके कामकाज पर सख्त निगरानी के भी संदेश दिए हैं।
इसके अलावा अधिकारी अब गांवों में रात को तो ठहरेंगे ही, ठाठ भी नहीं बघारेंगे। उन्हें गांवों में उपलब्ध संसाधनों का ही उपयोग कर रात में रुकना होगा। शायद तब वे गांव के लोगों की मुश्किलें ज्यादा समझ पाएंगे।
पिछले दिनों राजस्व परिषद के चेयरमैन जावेद उस्मानी ने जिलों के कामकाज की समीक्षा की तो पता चला कि कमिश्नर व कलेक्टर तय समय पर न तो गांवों के भ्रमण पर जा रहे हैं और न ही रात्रि निवास कर रहे हैं।
यदि कहीं अफसर गए भी तो ठीक से प्रचार-प्रसार नहीं हो रहा। कई बार वरिष्ठ अधिकारी गांवों में भ्रमण पर गए तो वहां मातहत कर्मचारी ही गायब थे। राजस्व परिषद के चेयरमैन का यह फीडबैक शासन पहुंचा तो मशीनरी सक्रिय हो गई।