रायबरेली में आतंकियों के साथ बांग्लादेश और म्यांमार के रोहिंग्या की घुसपैठ 90 के दशक से बनी हुई है। मुंबई बम धमाके के बाद दाउद के डी-2 गैंग और टाइगर मेनन के गुर्गों के लिए रायबरेली स्लीपर सेल सरीखा रहा। बछरावां और शहर के कहारों का अड्डा सहित मुस्लिम बहुल इलाकों में इनको पनाह मिलती रही। बाद में आतंकी करीम टुंडा को एटीएस ने गिरफ्तार भी किया था।
सन 2006 के बाद रायबरेली बांग्लादेशियों की शरणास्थली बनने लगा। कारण उन्नाव के स्लाटर हाउसों में बांग्लादेशी मीट कटर काम करने लगे। वहां की लोकल इंटेलीजेंस फेल रही और बांग्लादेशियों ने उन्नाव के साथ रायबरेली के खीरों, सरेनी, लालगंज में अपनी पकड़ बनानी शुरू कर दी। इस पर कभी भी रायबरेली पुलिस और लोकल इंटेलीजेंस ने खोजबीन की जरूरत नहीं समझी। छह माह रायबरेली के खीरों में एक बंग्लादेशी परिवार को बाकायदा पक्के मकान में निवास करते पकड़ा गया था। आरोपियों को जेल भेज दिया गया और फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी गई।
इसी तरह 2012 से जब म्यांमार में रोहिंग्या का पलायन शुरू हुआ तो वह पश्चिम बंगाल के रास्ते रायबरेली में अपनी जमीन तलाशने लगे। बगल के जिले कानपुर में रोहिंग्या को सफेदपोशों ने मदद दी और वह उन्नाव में स्लाटर हाउस के जरिए जिले में शरण लेने लगे। यही कारण रहा कि 2021 में एटीएस ने रोहिंग्या की शरण की तफ्तीश को लेकर नगर पालिका उन्नाव के निवास प्रमाण पत्रों को खंगाला था। उन्नाव के रास्ते से ही रोहिंग्या के लिए रायबरेली सेफ लैंड बन रहा है। रायबरेली में खीरों और सलोन दो ऐसे क्षेत्र हैं, जहां पर रोहिंग्या अपनी रिहाइश का बंदोबस्त कर रहे हैं।
19 हजार फर्जी प्रमाणपत्रों को इसी तार से जोड़ कर देखा जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि कोई मास्टरमाइंड सलोन में फर्जी प्रमाणपत्रों की पूरी लिस्ट बनाकर लाया था। जिसे जन सुविधा केंद्र के संचालक जीशान को सौंपा गया था। एटीएस की पूछताछ में जीशान ने यह स्वीकार किया था कि उसे लिस्ट मिली थी। किसने लिस्ट दी, उस पर वह जानकारी नहीं दे सका था। इस पूरे फर्जीवाड़ा के लिए व्हाट्सएप नेटवर्क के साथ कमीशन में युवाओं को लगाया गया है। एटीएस ने जब एक साथ सात लोगों को पकड़ा था तो एक आरोपी ने बताया था कि फर्जी प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड, वीजा का कस्टमर लाने पर 30 प्रतिशत कमीशन दिया जाता था। साथ ही जितना बड़ा काम लाया जाता था तो उतना बड़ा कमीशन सेट था।
बरती जा रही सतर्कता: - देवीपाटन रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक एपी सिंह का कहना है कि सीमा से सटे जिलों में सतर्कता बरती जा रही है। गोंडा के बाद बलरामपुर में भी एटीएस ने कार्रवाई इस बात का सबूत है कि हमारी एजेंसियां सतर्क है। हर मूवमेंट पर हमारी नजर है। सीमा पर सीमा सुरक्षा बल के साथ हमारा समन्वय है। सभी मिलकर काम कर रहे हैं।