चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि छठ के बाद पांच दिन काफी अहम होंगे। क्योंकि भीड़-भाड़ में जो लोग संक्रमित होंगे, उसका असर पांच दिन में दिखेगा। 25 से 31 अक्तूबर के बीच संक्रमण की दर 4.91 फीसदी है।
एक से 7 नवंबर के बीच संक्रमण की दर घटकर 3.10 पहुंची और 8 से 13 नवंबर के बीच यह दर 3.17 फीसदी रही। 14 से 17 नवंबर के बीच 20708 सैंपल लिए गए, जिनमें 948 पॉजिटिव केस मिले। यह दर 4.57 फीसदी है। दीवाली के बाद तीन दिन में ही संक्रमण की दर में 1.40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। 18 से 20 के बीच में संक्रमण की दर 3.80 फीसदी बनी हुई है।
धनतेरस से दीपावली के बीच बाजार में भीड़भाड़ अधिक रहने से संक्रमण की दर बढ़ी है। तमाम ऐसे लोग हैं जो जांच के दायरे में नहीं आए। ऐसे में सिर्फ डाटा से संक्रमण की दर का आंकलन नहीं किया जा सकता। छठ पर भी भीड़-भाड़ बढ़ी है। कई लोग एक से दूसरे जगह पहुंचे हैं। ऐसे में संक्रमण की दर बढ़ने से इनकार नहीं किया जा सकता। छठ के बाद पांच दिन मरीजों की संख्या नियंत्रित रही तो हालात सामान्य स्तर पर बने रहने की उम्मीद है। भागदौड़ के बीच जो संक्रमित हुए होंगे उनमें 4 से 6 दिन के बीच असर दिख जाएगा।
-डॉ. पीके गुप्ता, पूर्व अध्यक्ष आईएमए
मास्क व सोशल डिस्टेंसिंग से ही कोरोना से बचाव
हर स्तर पर सावधानी बरतने की जरूरत है। त्योहार पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो पा रहा है तो मास्क का इस्तेमाल तो किया ही जा सकता है। मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग कोरोना को मात देने का सबसे सरल व सटीक तरीका है। जो भी लोग त्योहार मना रहे हैं, उन्हें लगातार मास्क लगाए रखना चाहिए। घर पहुंचने पर अच्छी तरह से साबुन से हाथ-पैर धुलने और कपड़े बदलने के बाद ही घर में प्रवेश करें। यदि परिवार में बुजुर्ग और बीमार लोग हैं तो पूजा स्थल से लौटने के बाद दो दिन तक उनसे दूरी बना कर रखें।
-डॉ. वेद प्रकाश, विभागाध्यक्ष पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर, केजीएमयू