दिल्ली में आम आदमी पार्टी ‘आप’ की राजनीति का असर दूसरे दलों पर भी दिखने लगा है।
महाराष्ट्र में कांग्रेस के भीतर ही बिजली के रेट कम करने की मांग उठ गई है तो राजस्थान में भाजपा की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपने सुरक्षा बेड़े को कम कर दिया है।
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेशचंद पोखरियाल निशंक ने भी लालबत्ती न लगाने का फैसला किया है।
इसी क्रम में उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने बुधवार को जोर देकर कहा कि लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी किसी दागी या उसके परिवार वाले को टिकट नहीं देगी।
वाजपेयी का यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी ने दबंगों के लिए दरवाजे खोल दिए थे।
चर्चित एनआरएचएम घोटाले के आरोपी बाबूसिंह कुशवाहा के साथ ही बसपा से बाहर किए गए बादशाह सिंह को गले लगाकर पार्टी विवादों के घेरे में आ गई थी। ये दोनों नेता अब भी जेल में हैं।
भाजपा मुख्यालय में खबरनवीसों से बातचीत में डॉ. वाजपेयी ने कहा कि काले धन और भ्रष्टाचार का मुद्दा लालकृष्ण आडवाणी ने सबसे पहले उठाया था।
भ्रष्टाचार को अन्ना हजारे और काले धन को स्वामी रामदेव ने बड़ा मुद्दा बनाया। लोकसभा चुनाव में भ्रष्टाचार भाजपा का मुद्दा रहेगा।
उन्होंने कहा, टिकट की घोषणा उचित समय पर की जाएगी और दागियों को चुनाव में नहीं उतारा जाएगा। जिताऊ फैक्टर का भी ध्यान नहीं रखा जाएगा।
वाजपेयी ने मुजफ्फरनगर-शामली में दंगा पीड़ितों के राहत शिविरों में मौत के लिए प्रदेश सरकार को जिम्मेदार ठहराया। आरोप लगाया कि सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है।
डॉ. वाजपेयी ने कहा, वर्ष 2013 सांप्रदायिक उन्माद के नजरिये से दुर्भाग्यपूर्ण रहा। सपा सरकार में दंगों का शतक लगा।
सरकार के मंत्री, विधायक और नेता ही कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती का कारण बने। सरकार की एक पक्षीय कार्रवाई से मुजफ्फरनगर दंगा हुआ।
वहां राहत शिविरों में नवजातों की मौत के दो ही कारण हो सकते हैं। या तो उनके पास ठंड से बचाव के लिए कपड़ों की कमी थी या फिर उन्हें बीमारी का इलाज नहीं मिला।
दोनों ही स्थितियों के लिए प्रदेश सरकार, खास तौर से स्वास्थ्य मंत्री जिम्मेदार हैं। बच्चे मर रहे थे और सरकार रास-रंग में व्यस्त रही।
भाजपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि प्रदेश में विकास कार्य ठप हैं। सड़कें खस्ताहाल है, आम लोगों पर बिजली दरों में बढ़ोतरी का भार पड़ा।
स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। पूर्वांचल में जापानी इंसेफलाइटिस नैनिहालों पर कहर बनकर टूटी है। गन्ना किसानों की सुनवाई नहीं हुई, जिससे वे आत्महत्या के लिए मजबूर हुए।
उन्होंने बसपा पर भी निशाना साधा। कहा कि विधानसभा चुनाव हारने के बाद मायावती प्रदेश से पलायन कर गई हैं। जनहित से जुड़े किसी भी मुद्दे पर बसपा ने सरकार की मुखालफत नहीं की।