प्रोसेसिंग यूनिट की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आलू बीज का उत्पादन करने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर दस हजार रुपये ज्यादा अनुदान दिया जाएगा।
उद्यान निदेशालय स्तर पर तैयार हुई आलू नीति में इसका प्रावधान किया गया है।
प्रदेश में आलू की 11 प्रोसेसिंग यूनिट हैं, मगर इन्हें उम्दा किस्म के आलू की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इसका वजह यह है कि किसानों को उपयुक्त किस्म का बीज नहीं मिल पाता।
प्रोसेसिंग यूनिट को हर साल लगभग तीन लाख टन उम्दा किस्म के आलू की जरूरत होती है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत प्रति हेक्टेयर आलू बीज उत्पादन पर किसान को 25 हजार रुपये अनुदान दिया जाता है।
एक किसान अधिकतम पांच हेक्टेयर पर यह अनुदान ले सकता है। नई आलू नीति में तय किया गया है कि प्रोसेसिंग वेरायटी सीड तैयार करने वाले किसान को प्रति हेक्टेयर 35 हजार रुपये अनुदान दिया जाएगा। 25 हजार रुपये तो केंद्र सरकार देती है, वहीं 10 हजार रुपये राज्य सरकार देगी।
वहीं, आलू बीज की बिक्री में आने वाली दिक्कतों को दूर करने के लिए नेशनल हार्टीकल्चर रिसर्च एंड डवलपमेंट फाउंडेशन (एनएचआरडीएफ), उद्यान विभाग और किसानों के बीच त्रिपक्षीय समझौता भी होगा।
अभी तक किसान खुद ही बीज बेचता था, लेकिन नई व्यवस्था में एनएचआरडीएफ ही किसानों से बीज खरीदकर उसे कोल्ड स्टोरेज में रखेगी।
उद्यान विभाग एनएचआरडीएफ को ये आंकड़े मुहैया कराएगा कि किस जिले में प्रोसेसिंग वेरायटी सीड का कितना उत्पादन हो रहा है और किस जिले में इसकी कितनी डिमांड है।
मांग के अनुरूप बीज आपूर्ति की जिम्मेदारी एनएचआरडीएफ की ही होगी। निदेशालय स्तर पर तैयार की गई आलू नीति को शासन ने भी मंजूरी के संकेत दे दिए हैं।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक आज
आलू उत्पादन नीति को लेकर गुरुवार को मुख्य सचिव जावेद उस्मानी की अध्यक्षता में सचिवालय में बैठक होगी।
इसमें उद्यान निदेशक समेत तमाम वरिष्ठ अफसर हिस्सा लेंगे। इसके बाद यह ड्राफ्ट मंजूरी के लिए कैबिनेट को भेज दिया जाएगा।
153 लाख टन आलू उत्पादन का लक्ष्य
इस साल प्रदेश में 153 लाख टन आलू उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। पिछले साल 135 लाख टन आलू की पैदावार हुई थी, जिसमें से साठ फीसदी हिस्सा 11 जिलों आगरा, फीरोजाबाद, कन्नौज, फर्रुखाबाद, अलीगढ़, हाथरस, मैनपुरी, बदायूं, बाराबंकी, मथुरा और इटावा का था। ये जिले आलू उत्पादन के लिए पूरे देश में जाने जाते हैं।