मृतक आश्रित कोटे में वारिस को अब राशन दुकान का आवंटन अब अनुकंपा पर नहीं बल्कि पात्रता के आधार पर ही किया जाएगा। खाद्य व रसद विभाग की तरफ से इस संबंध में जारी नए दिशा निर्देश में मृतक कोटेदार की ख्याति की अच्छी छवि के आधार पर वारिस को कोटे की दुकान आवंटित करने की पुरानी व्यवस्था समाप्त कर दी गई है।
अब राशन दुकानदार की मृत्यु के बाद मृतक आश्रित कोटे में राशन दुकान का आवंटन पाने के लिए मृतक कोटेदार के वारिस को नए सिरे से आवेदन कर दुकान संचालन संबंधी सभी पात्रता पूरी करनी होगी। इसके आधार पर ही ग्रामीण क्षेत्र में एसडीएम और शहरी क्षेत्र में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी अधिकतम दो माह में ऐसे मामलों का निस्तारण करेगी।
यह जानकारी अतिरिक्त खाद्य आयुक्त अनिल दुबे ने दी। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही मृतक आश्रित कोटे की राशन दुकानों के आवंटन की बंद चल रही प्रक्रिया अब दोबारा शुरू हो जाने से राशन दुकानदारों के स्तर पर लगातार की जा रही मांग भी पूरी हो जाएगी।
उन्होंने बताया कि अभी तक राशन दुकानदार की मृत्यु हो जाने पर उसके वारिस को परिवार के भरण पोषण के लिए मृतक आश्रित कोटे में राशन दुकान के संचालन का लाइसेंस जारी कर दिया जाता था। हालांकि, इसके तहत ऐसे राशन दुकानदारों के वारिस को मृतक आश्रित कोटे की दुकान का आवंटन नहीं होता था, जिनके खिलाफ गड़बड़ी की शिकायत रही हो। इसे अनुचित बताते हुए मृतक आश्रित कोटे के तहत राशन दुकान पाने से वंचित रहे कुछ वारिस ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर गुहार लगाई थी।