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भव्य व आधुनिक होगी नव्य अयोध्या, दिखेगा सर्वधर्म समभाव, जल्द प्रजेंटेशन देगी योगी सरकार

Tue, 12 Nov 2019 06:25 PM IST
ishwar ashish धीरेंद्र सिंह, अमर उजाला, अयोध्या
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राम मंदिर, अयोध्या
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मोदी सरकार त्रेतायुग जैसी नई अयोध्या का सपना साकार करने की तैयारी में जुट गई है। प्रदेश की योगी सरकार की त्रेतायुग जैसी दिवाली ने तीन साल में अयोध्या में पर्यटकों को आकर्षित करने से लेकर सुख-सुविधाएं देने की शुरुआत की थी।

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अब वैष्णो देवी और तिरुपति से भी ज्यादा आधुनिक सुविधायुक्त नई अयोध्या बसाने का खाका बनाने का काम शुरू हो गया है। शीर्ष अधिकारी बताते हैं कि राममंदिर ट्रस्ट का स्वरूप बड़ा करके पहले से तैयार नव्य अयोध्या के लिए लंदन की कंसल्टेंट एजेंसी प्राइस वाटर हाउस कूपर्स को शामिल करने की योजना है।

लाखों रुपये खर्च करके तैयार इस रिपोर्ट को पिछले एक साल से सिर्फ इसलिए रोक दिया गया था कि पहले अयोध्या विवाद का फैसला आ जाए। नव्य अयोध्या में प्रस्तावित श्रीराम एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देने के साथ सरयू में क्रूज, आधुनिक बस अड्डा, विश्व की सबसे ऊंची प्रभु राम की प्रतिमा, अंतरराष्ट्रीय स्तर के होटल-रिजॉर्ट्स के साथ प्रभुराम से जुड़े स्थलों को वाया प्रयागराज-चित्रकूट से लेकर रामेश्वरम और लंका तक श्रद्धालुओं को दर्शन-पूजन और अध्यात्म से जोड़ने की योजना पर काम शुरू हो रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 2.77 एकड़ में रामलला का मुख्य गर्भगृह मंदिर बनेगा। साथ ही अधिगृहीत 67 एकड़ भूमि चार और मंदिरों के साथ सर्वधर्म समभाव का समूचा दर्शन कराने की योजना है। 

हालात सामान्य होते ही नई अयोध्या के खाका पर काम करेगा प्रशासन

फाइल फोटो
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही दिव्य दीपोत्सव के जरिए त्रेतायुग में रावण का वध करके भगवान राम के अयोध्या लौटने की खुशी को जीवंत करके विश्व में यहां पर्यटन की अपार संभावनाओं का द्वार खोल चुके हैं।

अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं देकर अयोध्या को त्रेतायुग जैसी नगरी बनाने का दायित्व राममंदिर ट्रस्ट के जरिए मिल चुका है। शीर्ष आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि राममंदिर ट्रस्ट बनाने की तैयारी के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या के वैश्विक विकास की संकल्पना पर रिपोर्ट मांगी है।

पहले ही नव्य अयोध्या के लिए लखनऊ-गोरखपुर हाईवे पर सरयू किनारे के किनारे करीब चार किलोमीटर मांझा बरहटा क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण करने की रिपोर्ट अयोध्या विकास प्राधिकरण शासन को भेज चुका है।

मंडलायुक्त मनोज मिश्र का कहना है कि यहां आधुनिक शहर की सारी सुविधाएं देने की तैयारी थी लेकिन अब बदले परिदृश्य में रामायण सर्किट, नव्य अयोध्या, राममंदिर ट्रस्ट की समन्वित रूपरेखा वृहत्तर विकास के लिए जरूरी है। अयोध्या मेें हालात सामान्य होते ही नई अयोध्या के खाका पर प्रशासन काम करेगा। 

मोदी-योगी कर रहे भव्य विकास की तैयारी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : अमर उजाला
अयोध्या के विधायक वेद प्रकाश गुप्ता बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला तो आना ही था लेकिन जिस तरह से केंद्र सरकार को जिम्मेदारी दी गई वह अयोध्यावासियों को लेकर गौरव का क्षण है।

अब संपूर्ण अयोध्या के अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन विकास पर हजारों करोड़ रुपये खर्च होंगे। राममंदिर ट्रस्ट न सिर्फ मंदिर बनाएगा बल्कि रामनगरी को त्रेतायुग जैसी संरचना देगा।

फैसले के बाद से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच भव्य राममंदिर के साथ नव्य अयोध्या को लेकर भव्य प्लान की तैयारी शुरू हो गई है।

हेरिटेज होटल व रिजॉर्ट्स की बढ़ी डिमांड 

प्रतीकात्मक तस्वीर
क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी आरपी यादव ने बताया कि अयोध्या विवाद से दस बड़े प्रोजेक्ट पंजीकरण के बाद भी आगे नहीं बढ़ रहे थे। अब राजा अयोध्या के राजसदन को पांच करोड़ से अधिक खर्च करके हेरिटेज होटल बनाने का प्रस्ताव है।

इसी के साथ फैैजाबाद शहर में कोहिनूर पैलेस भी हेरिटेज होटल विकसित होगा। इसके अलावा दो करोड़ से दस करोड़ की लागत से आठ होटल और रिजॉर्ट्स जल्द बन जाएंगे।

पर्यटन विभाग इसकी सारी औपचारिकताएं पूरी करा रहा है। इसके अलावा श्रद्धालुओं-पर्यटकों के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करीब छह सौ करोड़ से राम की पैड़ी, गुप्तारघाट, आधुनिक बस अड्डा, क्वीन हो पार्क, रामकथा पार्क समेत शहर में लाइटिंग से आदि सजा रही है।

ये बड़े काम जल्द दिखेंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- विश्व की सबसे बड़ी 251मीटर ऊंची श्रीराम की प्रतिमा
- श्रीराम हवाई अड्डे का अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के तौर पर विस्तार
- अयोध्या से कोलकाता तक क्रूज का संचालन 
- अयोध्या शहर के चारों तरफ रिंग रोड 
- अयोध्या रेलवे स्टेशन का विस्तारीकरण 
- 84 परिक्रमा मार्ग का फोरलेन निर्माण 

काशी के बाद अयोध्या में दिखेगा मोदी प्लान 
-शिवनगरी काशी से सांसद बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से वहां शहरी विकास के साथ विश्वनाथ मंदिर कॉरीडोर के जरिए आमूल-चूल बदलाव किया। अब वैसा ही प्लान रामनगरी अयोध्या में दिखेगा।

रामलला का मंदिर बनाने के लिए विश्व हिंदू परिषद ने 140 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाया था। जबकि विश्वनाथ कॉरिडोर का बजट 700 करोड़ का था। अब 70 एकड़ में राममंदिर बनाने में विहिप से कई गुना अधिक खर्च आएगा।

रामनगरी के आगे फीकी थी कुबेर की अलकापुरी 

विराजमान रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास - फोटो : अमर उजाला
विराजमान रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास कहते हैं कि रामनगरी के आगे कुबेर की अलकापुरी भी फीकी थी। आक्रांताओं के प्रहार ने इस दिव्य नगरी को उजाड़ दिया था।

अब प्रधानमंत्री मोदी को सुप्रीम कोर्ट से आदेश मिल गया है। उम्मीद है कि वे त्रेतायुग जैसी रामनगरी भले ही बने, लेकिन उसकी संकल्पनाओं को साकार करता हुआ ‘परहित सरिस धर्म नहि भाई...’का दिखना चाहिए।

इन मंदिरों में भी लौटेगी भव्यता 
अधिग्रहण की वजह से रामकोट क्षेत्र के दर्जन भर से अधिक मंदिर भक्तों से दूर हो गए थे। यहां आरती, भोग तक बंद हो चुका है। चढ़ावा नहीं आने से कोई साधु टिकता ही नहीं।

अब राममंदिर बनने के साथ इन मंदिरों की भी आभा लौटेगी। श्रीराम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास कहते हैं कि वह भारत सरकार ने अधिग्रहण की वजह से मंदिरों में बंद पूजा-पाठ को अपने नियंत्रण में लेकर संचालित करने का आग्रह करेंगे।

यह सभी मंदिर मानस भवन, सीता रसोई, आनंद भवन, फकीरेराम मंदिर को भी स्वरूप देने के साथ नए सिरे से स्थापना पूजन कार्य भी करना होगा।  

लंदन और जापान के सिटी प्लान का अध्ययन

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने अयोध्या के विकास को लेकर मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों से पहले ही योजनाएं मांगी थीं। सपा सरकार में रामायण सर्किट प्लान तमाम परिस्थितियों में फंसता रहा।

लेकिन योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनते ही जिस पर्यटन विभाग के पास साल में दस लाख रुपये के भी काम नहीं थे, उसने अब तक करीब 700 करोड़ के ठेके दिए। लाखों खर्च करके लंदन की कंसल्टेंट एजेंसी प्राइस वाटर हाउस कूपर्स से अयोध्या के विकास का अध्ययन कराया गया।

धार्मिक नगरी अयोध्या में सैकड़ों पुरानी इमारत व मंदिर के साथ पतली सड़कें हैं। 178 पौराणिक मठ-मंदिरों को जर्जर होने के नाते ध्वस्त करने की नगर निगम नोटिस दे चुका है।

इस मामले में दिव्य दीपोत्सव मनाने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नगर निगम से सरकारी धन खर्च करके मरम्मत का प्रस्ताव मांगा था। अब सारा मामला मोदी के अधीन जाने से ऐसे भवनों और गलियों के सुंदरीकरण का अनुपम उदाहरण देने वाले जापान के क्योटो शहर की योजना भी साकार होती दिखेगी।

तत्कालीन डीएम अनिल कुमार बताते हैं कि जून 2018 इस रिपोर्ट को शासन के समक्ष प्रस्तुत किया था। पीडब्ल्यूडी, पर्यटन विभाग और अयोध्या विकास प्राधिकरण ने भी मंथन किया था।

कॉरपोरेट घरानों की भी नजर 

महंत स्वामी देव प्रसाद दास - फोटो : अमर उजाला
अयोध्या सिर्फ रामनगरी ही नहीं बल्कि बौद्ध, जैन, स्वामी नारायण, सिख गुरुओं और शीश पैगंबर के साथ तमाम सूफी संतों की उर्वरा भूमि है। श्री स्वामी नारायण मंदिर रायगंज के महंत स्वामी देवप्रसाद दास कहते हैं कि यहां से 30 किलोमीटर दूर छपिया गोंडा में स्वामी नारायण का जन्म हुआ था।

अयोध्या उनकी रमण भूमि है। गुजरात से आने वाले हर भक्त को अयोध्या और छपिया का दर्शन करना पुण्य के लिए जरूरी होता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब अडानी और अंबानी जैसे उद्यमी छपिया से अयोध्या तक विकास का प्लान बना सकते हैं।

ये घराने यहां पहले भी कार्यक्रमों में आते रहे हैं। दिगंबर जैन मंदिर भी कॉरपोरेट घरानों को अयोध्या आने के लिए मजबूर करते हैं, लेकिन विवाद और दहशत से हर कोई निवेश करने से कतराता था।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर का पर्यटन हब बनेगी अयोध्या

प्रतीकात्मक तस्वीर
सांसद लल्लू सिंह बताते हैं कि केंद्र और राज्य सरकार अयोध्या को अंतरराष्ट्रीय स्तर का पर्यटन स्थल बनाने पर मंथन कर रही थी। इसी के तहत यहां अवध के पांच जिलों से होकर गुजरी 84 कोसी परिक्रमा मार्ग की सांस्कृतिक सीमा पर महाराज दशरथ, प्रभु राम समेत आदिकाल से अध्यात्म और ज्ञान के स्रोत रहे ऋषि-मुनियों के आश्रम-मंदिर को फोरलेन मार्ग से जोड़ने की स्वीकृति भी हुई।

सरयू के गुप्तारघाट से गंगा के रास्ते कोलकाता तक क्रूज चलाने के प्रस्ताव पर भी काम शुरू हुआ। केंद्रीय जहाजरानी एवं भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने 84 कोसी परिक्रमा मार्ग के साथ अयोध्या-फैजाबाद शहर के चारों तरफ रिंग रोड बनाने के कार्य का शिलान्यास भी किया है।

केवल अयोध्या विवाद के कारण अयोध्या अंतरराष्ट्रीय स्तर का पर्यटन हब बनने से अयोध्या थी। अब इसे साकार स्वरूप मिलने जा रहा है।
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