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पुलिस को सिखाई बारीकियां: आईआईएम इंदौर के नवीन कृष्ण ने पुलिस उपाधिक्षकों को दी नेगोशिएशन की ट्रेनिंग

Wed, 01 Nov 2023 05:21 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला टीम डिजिटल, लखनऊ

सार

इस सत्र में प्रशिक्षु अधिकारियों को विभिन्न प्रकार के मनोविज्ञान और प्रबंधन के सिद्धांतों व मॉडलों के माध्यम से नेगोशिएशन एवं लोक प्रबंधन के बारे में बताया गया।
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ट्रेनिंग प्रोग्राम में नवीन कृष्ण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 भीमराव अंबेडकर उत्तर प्रदेश पुलिस अकादमी, मुरादाबाद में पुलिस उपाधिक्षकों के लिए चल रहे फाउंडेशन कोर्स के अन्तर्गत  “नेगोशिएशन” विषय पर एक प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण सत्र में 100 से अधिक प्रतिभागियों को आईआईएम इंदौर के मैनेजर श्री नवीन कृष्ण राय ने सम्बोधित किया। इस प्रशिक्षण सत्र का उद्देश्य प्रतिभागियों को मैनजमेंट से सम्बंधित कान्सेप्ट्स और सिद्वांतों से रूबरू कराना था। राय ने प्रबंधन, मनोविज्ञान और नेगोशीएशन से सम्बंधित विभिन्न कान्सेप्ट्स के माध्यम से प्रतिभाग कर रहे पुलिस उपाधिक्षकों को ‘नेगोशिएशन और कॉन्फ़्लिक्ट मैनेजमेंट” की तरकीबों के बारे में बताया।
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प्रशिक्षु पुलिस उपाधिक्षकों के लिए नेगोशिएशन एवं लोक प्रबंधन विषय पर प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। यह सत्र प्रांतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों के 89वाँ आधारभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम का एक हिस्सा था। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को आईआईएम इंदौर के मैनेजर नवीन कृष्ण राय ने सम्बोधित किया, जिसमें 100 से अधिक प्रशिक्षु पुलिस उपाधिक्षकों द्वारा प्रतिभाग किया गया।

इस सत्र में प्रशिक्षु अधिकारियों को विभिन्न प्रकार के मनोविज्ञान और प्रबंधन के सिद्धांतों व मॉडलों के माध्यम से नेगोशिएशन एवं लोक प्रबंधन के बारे में बताया गया। प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए राय ने टीम के लोगों के बेहतर प्रबंधन के लिए एक्सपेक्टेंसी थ्योरी ऑफ़ मोटिवेशन की मदद से बताया कि अपने टीम के सदस्यों का मोटिवेशन बनाए रखने के लिए उन्हें वही इनाम दें जिसे प्राप्त कर उन्हें ख़ुशी मिले।
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लोगों के निर्णय लेने के बारे में बात करते हुए राय ने बताया गया है कि लोग हमेशा तर्कसंगत व्यवहार नहीं करते हैं और वे पूर्वाग्रह रखते हैं। प्रास्पेक्ट सिद्धांत की मदद से प्रतिभागियों को बताया गया कि लोग लाभ और हानि को अलग-अलग महत्व देते हैं। समान मूल्य के लाभ और हानि होने की स्थिति में, कोई भी व्यक्ति उस लाभ से मिलने वाली ख़ुशी को उसी मूल्य के हानि से होने वाली पीड़ा की तुलना में से कम आंकता है। उसे उस पीड़ा का अहसास ज़्यादा होता है। 
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