राजधानी में ईईएसएल कंपनी से स्ट्रीट लाइटों के मेेंटेनेंस का काम छिनने के बाद नगर निगम को अब दोहरा खर्च नहीं उठाना होगा। निगम प्रशासन को हर महीने करीब पचास लाख रुपये की बचत होगी।
इससे पहले जहां कंपनी काम भी नहीं कर रही थी और भुगतान भी पूरा ले रही थी। इसके चलते नगर निगम प्रशासन को कर्मचारी और मरम्मत के काम में लगीं गाड़ियों के डीजल पर हर माह 37 लाख रुपये से अधिक का खर्चा करना पड़ रहा था।
मालूम हो कि ईईएसएल कंपनी तीन साल से दो लाख स्ट्रीट लाइटों के मेंटेनेंस के रखरखाव का काम संभाल रही थी। इसके लिए हर माह करीब पचास लाख रुपये वसूल रही थी, पर काम नहीं सही से कर रही थी।
लगातार शिकायतें आने के बाद नगर निगम को कार्यदायी संस्था के जरिये करीब 300 कर्मचारी स्ट्रीट लाइटों की मेंटेनेंस के लिए लगाने पड़े।
इस पर हर महीने 27 लाख रुपये से अधिक का खर्च हो रहा है। वहीं, मरम्मत के काम में आने वाली करीब 20 गाड़ियां भी लगानी पड़ी, जिनके संचालन पर हर महीने करीब दस लाख रुपये का डीजल लग रहा है।
बीते शुक्रवार को केंद्रीय राज्य मंत्री कौशल किशोर के सामने पार्षदों ने यह मामला उठाया तो उन्होंने ईईएसएल से काम छीनने का आदेश दिया। अब नगर निगम मरम्मत का कार्य खुद कराएगा।
मरम्मत कार्य में कंपनी की लापरवाही के कारण नगर निगम को कर्मचारी लगाकर काम कराना पड़ रहा था। कंपनी भी मेंटेनेंस का बिल दे रही थी। अब कंपनी से काम हटा तो नगर निगम को पैसा देने की जरूरत नही होगी।
- अजय द्विवेदी, नगर आयुक्त