डेंगू जानलेवा हो गया। ऐसे में डेंगू के बारे में ये तथ्य जो आपके लिए जानना जरूरी हैं। केजीएमयू के फिजियोलॉजी विभाग के प्रो.मनीष बाजपेई बताते हैं कि डेंगू की जांच के लिए कार्ड टेस्ट को मान्यता नहीं है। एलाइजा रिपोर्ट को ही सही माना जाता है।
दरअसल शरीर में इम्यूनोग्लोबिन एंटीबॉडी बनाता है। आसान शब्दों में कहें तो एंटीबॉडी एक सैनिक की तरह काम करता है। कोई वायरस या बैक्टीरया शरीर में घुसता है तो ये एंटीबॉडी उससे मुकाबला करता है। ये एंटीबॉडी ही आईजीजी, आईजीएम, आईजीए, आईजीई और आईजीडी कहलाती है।
कार्ड टेस्ट में आईजीजी पॉजिटिव आता है। जो कि पुरानी एंटीबॉडी होती है। यदि ये एक साल पहले भी मरीज को यदि डेंगू हुआ है तो मरीज के खून में आईजीजी पॉजिटिव की रिपोर्ट आएगी। आईजीजी टायफायड, पैरा टायफायड, वायरल फीवर में भी पॉजिटिव आता है।
यदि बीमारी कुछ दिन पहले ही हुई है तो मरीज के शरीर में आईजीएम एंटीबॉडी पॉजिटिव मिलेगी। अन्य वायरल फीवर से डेंगू की अलग पहचान के लिए ही एनएस-1 एंटीजन टेस्ट किया जाता है। यदि एनएस-वन और आईजीएम पॉजिटिव आता है तभी डेंगू होने की पुष्टि होती है। ये जांच सिर्फ एलाइजा टेस्ट से ही संभव है।
क्या करें जब हो डेंगू
डेमो पिक
आमतौर पर डेंगू में मरीज को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत नहीं होती है। पर गंभीर होने पर मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाना जरूरी हो जाता है और इसके लिए अस्पताल में भर्ती होना जरूरी है।
ये परिस्थिति तब आती है जब मरीज के रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या घट कर 10 हजार क्यूबिक मिलीमीटर से कम हो जाती है।
कुछ मरीजों में 10 हजार प्लेटलेट्स काउंट होने पर भी रक्तस्राव नहीं होता तो कुछ में 30 से 40 हजार काउंट होने पर रक्तस्राव की प्रकृति देखी गई है। ऐसे मरीजों के इलाज केलिए इंटेंसिव केयर यूनिट होना जरूरी है।
होम्योपैथी में है डेंगू से लड़ने की क्षमता
सूबे के सभी 32 अस्पतालों में सरकार यह सुविधा मुहैया कराएगी।
डेंगू बुखार की रोकथाम के लिए युपेटोरियम परफोलिएटम 200 दी जा सकती है। बच्चों को खाली पेट दो गोली तीन दिन तक सुबह और बड़ों को चार गोली खाली पेट तीन दिन तक सुबह दी जा सकती है।
इससे शरीर में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और डेंगू से लड़ने की शक्ति मिलती है। यदि बुखार हो तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। क्योंकि डॉक्टर लक्षण के आधार पर दवा की ताकत को घटा बढ़ाकर खुराक तय करता है। इसके आवा हल्का पौष्टिक सुपाच्य व गर्म भोजन मरीज को दें। समुचित विश्राम और नींद भी इसके साथ जरूरी है। -डॉ. अनिरुद्ध वर्मा, होम्योपैथी विशेषज्ञ
बुखार में सिर्फ पैरासिटामाल दें
dengue
इस मौसम में मरीज को बुखार होने पर अपनी मर्जी से ब्रूफेन, डिस्प्रिन जैसी दर्द की दवाएं नहीं खानी चाहिए। सिर्फ पैरासिटामॉल दवा ही लेनी चाहिए। यदि बुखार दो-तीन दिन से ज्यादा रहे तो फिर डेंगू की जांच और प्लेटलेट्स काउंट कराना चाहिए।
यदि प्लेटलेट्स की संख्या कम आती है तो घर पर ही आराम करना चाहिए। साथ ही रोगी के शरीर में तरल पदार्थ की उपलब्धता बनाए रखने के लिए ओआरएस घोल, नींबू पानी, लस्सी, फलों का रस, दूध, नारियल पानी देते रहना चाहिए। जिससे उसके शरीर में तरल पदार्थ की कमी न हो। यदि प्लेटलेट काउंट 15 हजार के नीचे हो या फिर मसूढ़ों, लैट्रीन में रक्तस्राव दिखे तो मरीज को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ती है-डॉ. डी हिमांशु, मेडिसिन विशेषज्ञ
आयुर्वेद से बढ़ाएं प्रतिरोधक क्षमता
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डेंगू के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के लिए तुलसी, अदरक, नींबू की चाय पीनी चाहिए। पहले तुलसी व अदरक को उबाल लें, उसके बाद उसमें चाय की पत्ती डालकर उबालें।
अंत में नींबू डालकर चाय को पिएं। इससे शरीर में डेंगू वायरस लड़ने की क्षमता विकसित होती है। इसके अलावा गिलोय घनवटी को सुबह-शाम दो-दो गोली वयस्क लोग और एक-एक गोली बच्चों को दी जा सकती है।
रात को सोने से एक चम्मच त्रिफला का चूर्ण लिया जा सकता है। ये पेट साफ करता है और इम्यूनिटी बढ़ाता है। बुखार होने पर एलोपैथी की दवा के साथ-साथ पपीते के पत्ते का रस भी पिया जा सकता है ये प्लेटलेट्स बढ़ाता है।- प्रो.पीसी चौधरी, आयुर्वेद विशेषज्ञ, राजकीय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज
कहां पैदा होते हैं डेंगू के मच्छर
dengue
डेंगू के मच्छर रुके हुए साफ पानी में पैदा होते हैं
हैंडपंप के पास पानी जमा होने से
बेकार पड़े टायर व बर्तनों में
अनुपयोगी कुओं में
खुली पानी की टंकियों, कूलर
फूलदान व गमलों में
कैसे बचें
नल और हैंडपंप के पास पानी न जमा होने दें
बुखार के रोगी को मच्छरदानी में ही सुलाएं
शरीर के खुलें भागों में मच्छर रोधी दवा, नीम या सरसों का तेल लगाकर सोएं
पूरी आस्तीन के कपड़े पहन कर सोएं
कमरे में नीम की पत्ती का धुआं करें
गुग्गुल के धुएं से मच्छर भगाएं
पानी के सभी बर्तन, टंकी को बंदकर रखें
कूलर, फूलदान आदि की हर सप्ताह सफाई करें
लक्षण
10 दिन तक रह सकता है तेज बुखार
पांच-छह दिन में होती है हालत गंभीर
तेज सिर दर्द, आंखों के पीछे और आसपास दर्द
मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
शरीर पर लाल चकत्ते या निशान
मसूड़ों या शौच में खून आना