शरीअत के मुताबिक सादगी से मस्जिद में निकाह करने, दहेज के बहिष्कार सहित शादियों में फिजूलखर्ची से परहेज करने के लिए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के इकरारनामे को जुमे की नमाज में इमामों ने पढ़कर सुनाया। साथ ही 11 बिंदुओं वाले इकरारनामे के मुताबिक निकाह करने की अपील की गई। नमाज के बाद मुसलमानों ने इकरारनामे पर हस्ताक्षर कर इस मुहिम को सफल बनाने का संकल्प लिया।
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ऐशबाग ईदगाह स्थित जामा मस्जिद में जुमे की नमाज से पहले ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि निकाह सुन्नत तरीके से किया जाए। निकाह किसी रस्म का नाम नहीं, बल्कि इसे एक इबादत का दर्जा मिला है, लिहाजा किसी भी इबादत में नाजायज या हराम काम नहीं किया जा सकता। मौलाना ने कहा कि इस इकरारनामे के माध्यम से मुसलमानों को बोर्ड ने यह भी सलाह दी कि निकाह के कार्यक्रम या वलीमे में किसी भी प्रकार का नाच गाना या आतिशबाजी न की जाए।
निकाह समारोह को सादगी के साथ कम खर्च में किया जाए और वक्त की पाबंदी का भी विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि इस इकरारनामे में यह भी जोर दिया गया कि इस्लामी शरीअत के आदेश के मुताबिक दूल्हे को चाहिए कि वह दुल्हन का महर तुरंत अदा करे।
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मौलाना फरंगी महली ने इस बात पर भी जोर दिया कि शरीअत के अनुसार बेटियों को वरासत में जो अधिकार मिला है उससे उन्हें महरूम करके गुनहगार न बनें, बल्कि बेटियों को शरई अधिकार जरूर दें। नमाज के बाद एक बोर्ड पर इस इकरारनामे को लगाया गया, जिस पर नमाजियों ने हस्ताक्षर कर समर्थन दिया।
निकाह सुन्नत तरीके से किया जाए।
निकाह या वलीमे में नाच गाना या आतिशबाजी न की जाए।
निकाह समारोह सादगी के साथ कम खर्च में किया जाए
दूल्हे को चाहिए कि वह दुल्हन का महर तुरंत अदा करें।