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तीन तलाक : मुस्लिम महिलाएं बोलीं- कानून तो अच्छा, पर राजनीतिक नफा-नुकसान तक ही सीमित

Sun, 19 Dec 2021 03:04 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

मुस्लिम महिलाओं का कहना है कि तीन तलाक कानून अच्छा है। इससे महिलाओं को लाभ मिला है। हालांकि, न तो कानून के ठीक से अमल पर और न ही महिलाओं के स्वावलंबन पर ध्यान दिया जा रहा है।
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नाहिद अकील व उजमा कमर। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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तीन तलाक कानून बने दो साल हो गए। बुद्धिजीवी मुस्लिम महिलाएं कानून को प्रगतिशील भी करार देती हैं। वह दलील देती हैं कि तीन तलाक शरिया का हिस्सा नहीं था। इस सबके बावजूद आज भी ज्यादातर आम मुस्लिम महिलाएं इस पर खुलकर बोलने से परहेज करती हैं। क्योंकि इस मुद्दे पर राजनीतिक संरक्षण को लेकर वे मुतमईन नहीं हैं।

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बातचीत के दौरान यह आशंका साफ तौर पर उभरकर सामने आती है। तो वहीं कुछ महिलाएं सवाल उठाती हैं कि इसे ठीक से लागू नहीं किया गया। सिर्फ राजनीतिक नफा-नुकसान तक सरकार सीमित रही। मुस्लिम महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। लखनऊ निवासी सामाजिक कार्यकर्ता नाहिद अकील कहती हैं कि तीन तलाक के खिलाफ कानून अच्छा है। पर, कानून होना भर पर्याप्त नहीं। इसका पालन कराने पर भी तो ध्यान देना होगा।

शरिया के अनुसार भी एक झटके में कहने भर से तलाक नहीं दिया जा सकता। अगर कोई महिला गर्भवती है, तो भी उसे तलाक नहीं दे सकते। गर्भ धारण के दौरान शौहर को बीवी का पूरा ख्याल रखने की बात भी शरिया में कही गई है। मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं कि वर्तमान सरकार ने राजनीतिक नजरिए से तीन तलाक कानून को खूब उछाला, पर मुस्लिम महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए कुछ नहीं किया।
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आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बने बिना महिलाएं कभी भी समाज में बराबरी का हक नहीं पा सकतीं। उन्हें शैक्षणिक तौर पर आगे बढ़ाने के लिए कुछ नहीं किया गया। आवास, शौचालय और पट्टे पर जमीन देने में उन्हें भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए। मेरा मानना है कि जो भी सरकार सत्ता में आए, उसे इन सब पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।...क्योंकि समाज में महिलाओं की स्थिति कैसी है, यह किसी से छिपी नहीं है। इसलिए मुस्लिम महिलाओं के लिए विशेष पैकेज लाया जाना चाहिए।

बरेली की मनोविज्ञानी उजमा कमर इसे प्रगतिशील कानून मानती हैं। वह कहती हैं, तीन तलाक का काफी दुरुपयोग हो रहा था। इसलिए इसे कानून से जोड़ना अच्छा कदम है। इससे मुस्लिम महिलाओं को काफी राहत भी मिली है। पुरुषों के बेहद आसानी से फोन पर या इंटरनेट के माध्यम से तलाक देने के मामलों पर काफी हद तक रोक लगी है। शरिया में तीन तलाक के लिए कोई स्थान नहीं है। इसलिए सरकार को शरिया के नजरिए से भी इस बात को प्रचारित करना चाहिए।

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सरकारी योजनाएं अच्छी, पर ठीक से हो अमल

उजमा का मानना है कि सरकार महिलाओं के लिए कई योजनाएं चला रही है। ये योजनाएं महिलाओं की जिंदगी में बदलाव ला सकती हैं। लेकिन, समय-समय पर इसका मूल्यांकन जरूर होना चाहिए कि इनका कितना फायदा आम महिलाओं और खासकर मुस्लिम महिलाओं को मिल रहा है। आज भी सरकार की योजनाओं का फायदा उसकी अच्छी मंशा के बावजूद पर्याप्त रूप से आम पात्र महिलाओं तक नहीं पहुंच पा रहा है। अगर इन योजनाओं तक आम परिवारों की महिलाओं की पहुंच बन जाए तो मुस्लिम महिलाओं के हालात भी बदल सकते हैं।
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