राजधानी लखनऊ में भले ही संक्रमण दर बढ़ गई हो, लेकिन घबराएं नहीं। पिछले साल सितंबर की अपेक्षा अब भी राजधानी में मृत्यु दर कम है। इतना ही नहीं पूरे प्रदेश की अपेक्षा लखनऊ में होने वाली मौत का ग्राफ 0.06 फीसदी अधिक है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि राजधानी में होने वाली मौतों में आसपास के जिलों के मरीज भी शामिल हैं। ऐसे में मौत के आंकड़ों से घबराने की बजाय संक्रमण दर कम करने पर जोर देना होगा।
राजधानी में अब तक 1353 लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है। पूरे प्रदेश में यह आंकड़ा 9224 है। कोरोना की पहली लहर के दौरान सबसे ज्यादा 17 लोगों की मौत छह सितंबर को हुई थी। कुल मिले मरीजों की अपेक्षा इस दिन मृत्यु दर 1.70 फीसदी थी। इसी तरह राजधानी में सर्वाधिक 1244 मरीज 18 सितंबर को मिले थे और इस दिन 16 की मौत हुई थी।
यह 1.28 फीसदी है। वहीं, सात से 12 अप्रैल के बीच मिले कुल मरीजों की अपेक्षा मौत का ग्राफ 0.52 प्रतिशत है, जबकि प्रदेश का ग्राफ 0.46 फीसदी है। इस तरह देखा जाए तो पूरे प्रदेश में होने वाली कुल मौत की अपेक्षा राजधानी में 0.06 फीसदी मरीजों की अधिक मौत हुई है।
मुरादाबाद मंडल में कोरोना संक्रमण से छह की मौत
मुरादाबाद मंडल में कोरोना संक्रमण से न्यायिक अधिकारी समेत छह लोगों की मौत हो गई है। अपर जिला जज और कटघर सीओ समेत 166 संक्रमित मिले हैं। इससे पहले रविवार को चौबीस घंटे में पांच लोगों की मौत हो चुकी है। अप्रैल माह में अभी तक चौदह लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है।
झांसी-ललितपुर में कोरोना के रिकॉर्ड 609 मरीज मिले
झांसी और ललितपुर में कोरोना वायरस से हालात भयावह होते जा रहे हैं। मंगलवार को दोनों जनपदों को मिलाकर 609 मरीज सामने आए। इसमें झांसी में 462 और ललितपुर में 147 संक्रमित मिले हैं।
आगरा में 14 महीनों का रिकार्ड टूटा
कोरोना वायरस का ताजनगरी में भयानक रूप देखा जा रहा है। 14 महीनों का रिकार्ड टूट गया है। पहली बार 197 नए मरीज मिलने से सक्रिय रोगियों की सख्या 909 हो गई है। 182 मरीजों की मौत हो चुकी है।