सदस्यता के बहाने भाजपा के बड़े नेता भी जनाधार व लोकप्रियता की कसौटी पर आ गए हैं। सदस्यता अभियान की जिस तरह से रचना की गई है, उससे साफ है कि पार्टी सिर्फ सदस्यता अभियान ही नहीं चला रही है बल्कि इस बहाने उसने पार्टी के नेताओं की अपने-अपने इलाके में पहुंच व पकड़ तथा जनाधार का सच जानने का भी इंतजाम किया है।
पार्टी के रणनीतिकारों ने अलग-अलग श्रेणी के पदाधिकारियों का लक्ष्य तय कर दिया है। पार्टी के प्रत्येक बूथ पर भाजपा के कम से कम सौ सदस्य बनाने का फैसला किया गया है तो यह भी कहा गया है कि वर्तमान सक्रिय कार्यकर्ताओं में प्रत्येक कम से कम 5000 सदस्य बनाएं। जिलों से लेकर प्रदेश पदाधिकारियों तक के लक्ष्य तय किए गए हैं। विधानसभा के प्रत्येक क्षेत्र में 50 हजार लोगों को सदस्य बनाने का लक्ष्य सौंपा गया है।
जिला स्तरीय पदाधिकारियों व प्रदेश पदाधिकारियों के लिए भी लक्ष्य तय किया जा रहा है। जिला स्तरीय पदाधिकारियों को संबंधित न्याय पंचायतों के सभी ग्राम पंचायतों में पार्टी की इकाइयां गठित करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।
प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों को संबंधित ब्लॉकों की सभी ग्राम पंचायतों में भी पार्टी के गठन की जिम्मेदारी दी जाएगी। इसी तरह मोर्चा-प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों को भी सदस्यता का लक्ष्य देने की तैयारी है।