सपा मुखिया अखिलेश यादव लोकसभा चुनाव नतीजे आने के बाद से अभी अपने संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ में जीत का आभार जताने ही पहुंच पाए थे, बसपा सुप्रीमो मायावती ने चुनावों में गठबंधन के हार का ठीकरा एक तरह से सपा के मत्थे फोड़ दिया।
विज्ञापन
मायावती ने गठबंधन खत्म करने का स्पष्ट संकेत करते हुए पूर्व की घोषित नीति से उलट सभी 11 विधानसभा सीटों का उपचुनाव लड़ने का एलान किया है। विधायकों को सांसद चुने जाने से ये सीटें खाली हो रही हैं। बसपा सालों से उपचुनाव न लड़ने की नीति पर चलती रही है।
मायावती ने सोमवार को नई दिल्ली में यूपी के जिम्मेदार नेताओं, जोन इंचार्जों, जिला अध्यक्षों, जीते हुए सभी सांसदों और हारे हुए प्रत्याशियों की बैठक बुलाई थी। इसमें सपा-बसपा-रालोद गठबंधन की हार के कारणों की समीक्षा हुई। बैठक में शामिल एक सांसद ने बताया कि बहनजी ने कहा कि गठबंधन का कोई फायदा नहीं हुआ। वोट ट्रांसफर का फार्मूला सफल नहीं रहा।
विज्ञापन
तमाम जगह यादव वोट बसपा को नहीं मिले। यहां तक कि यादव सपा के साथ भी पूरी तरह नहीं रहे, वरना डिंपल यादव कन्नौज से व मुलायम परिवार के लोग अन्य सीटों से चुनाव न हारते। मायावती के निशाने पर पूर्व मंत्री शिवपाल यादव भी रहे। बसपा अध्यक्ष ने कहा कि शिवपाल ने कई जगह यादव वोट भाजपा को ट्रांसफर करा दिए।
एक विधायक ने बताया कि बहनजी ने कहा कि मुसलमानों ने बसपा का पूरा साथ दिया लेकिन सपा के लोगों ने कई जगह गठबंधन के खिलाफ काम किया। इसी के साथ उन्होंने विधानसभा की रिक्त होने वाली सभी 11 सीटों पर अकेले उपचुनाव लड़ने का एलान कर दिया। हालांकि उन्होंने गठबंधन तोड़ने की बात नहीं कही। लेकिन, एकतरफा सभी सीटों पर उपचुनाव लड़ने के एलान का अर्थ कोई भी लगा सकता है।
जोन इंचार्ज, जिला, विधानसभा प्रभारी हटे, चार सेक्टर में बंटा यूपी
मायावती ने चुनाव नतीजों की समीक्षा के बाद मौजूदा जोन इंचार्ज (कोआर्डिनेटर), जिला व विधान सभा प्रभारियों को हटा दिया है। हालांकि जिला संगठन बना रहेगा। उन्होंने संगठन को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए प्रदेश को चार हिस्सों में बांटकर सेक्टर इंचार्ज बनाए हैं।
लोकसभा में बसपा संसदीय दल के नेता व नगीना के सांसद गिरीश चंद्र को पश्चिमी यूपी की जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें मुरादाबाद, सहारनपुर, मेरठ, आगरा व अलीगढ़ मंडल का प्रभारी बनाया गया है। उनके साथ राजकुमार गौतम, शमशुद्दीन राईन, डा. कमलराज भी रहेंगे।
इसी तरह पूर्व सांसद मुनकाद अली को बरेली, लखनऊ, कानपुर, झांसी व चित्रकूट मंडल की जिम्मेदारी दी गई है। अली के साथ भीमराव अंबेडकर व जितेंद्र शंखवार को जोड़ा गया है। इलाहाबाद, मिर्जापुर, बनारस और आजमगढ़ मंडल की जिम्मेदारी अशोक गौतम, घनश्याम चंद्र खरवार, नौशाद अली व इंदल राम को दी गई है। गोरखपुर, देवीपाटन, फैजाबाद व बस्ती मंडल की जिम्मेदारी त्रिभुवन दत्त, सुनील कुमार चित्तौड़, केके गौतम व पवन कुमार गौतम संभालेंगे।
भाजपा के ‘50+’ फार्मूले पर बसपा, भाईचारा से बढ़ाएंगे आधार, 2022 की तैयारी शुरू
सपा-बसपा-रालोद गठबंधन की काट के लिए लोकसभा चुनाव में जिस तरह भाजपा ने हर बूथ ‘50+’ वोटों के साथ जीतने की योजना बनाई थी, बसपा उसी रास्ते पर आगे बढे़गी। बसपा ने 2007 की तरह एक बार फिर भाईचारा कमेटियों का प्रयोग आगे बढ़ाने का फैसला किया है।
बसपा अध्यक्ष ने पार्टी संगठन को बूथ स्तर तक नए सिरे से खड़ा करने और भाईचारा कमेटियां विधानसभा स्तर तक बनाने को कहा है। इसमें सर्वसमाज की भागीदारी होगी। बसपा अध्यक्ष ने कहा कि भाईचारा संगठन को मजबूत कर सर्वसमाज में जनाधार बढ़ाना है।
पार्टी अपने बेस वोट के साथ सर्वसमाज का समर्थन हासिल कर 50 से 60 प्रतिशत वोट शेयर अकेले जुटा सकती है। उन्होंने प्रत्येक विधानसभा स्तर तक भाईचारा संगठन खड़ा करने को कहा है। माना जा रहा है कि बसपा ने 2022 का विधानसभा चुनाव सभी सीटों पर लड़ने की तैयारी शुरू कर दी है।
कुशवाहा प्रदेश अध्यक्ष बने रहेंगे, एमपी का भी प्रभार
आरएस कुशवाहा प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाते रहेंगे। मायावती ने उन्हें मध्य प्रदेश का भी प्रभारी बना दिया है। कुशवाहा के पास चुनाव तक उत्तराखंड का प्रभार था। चुनाव बाद उत्तराखंड की जिम्मेदारी ले ली गई थी। अब उन्हें एमपी का प्रभारी बनाया गया है।