ऐसे में सपा ने भाजपा-बसपा की रणनीति को नाकाम करने के लिए 27 अक्तूबर को आनन-फानन में वाराणसी के अधिवक्ता प्रकाश बजाज का नामांकन निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में कराया। रणनीति यह थी कि राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान की स्थिति बने।
सपा नेताओं का कहना था कि बसपा तभी चुनाव जीत सकती है जब भाजपा उसकी मदद करे। यदि चुनाव नहीं हुए तो संदेश जाएगा कि भाजपा ने बसपा को राज्यसभा की एक सीट का तोहफा दे दिया है। इसी रणनीति के तहत सपा विधायक इरफान सोलंकी और राजकुमार यादव नाटकीय अंदाज में प्रकाश बजाज को लेकर नामांकन के लिए सेंट्रल हॉल पहुंचे।
प्रकाश बजाज ने राज्यसभा चुनाव के लिए निर्दलीय नामांकन दाखिल किया। जल्दबाजी ऐसी थी कि निर्वाचन अधिकारी ने प्राप्ति रसीद में प्रकाश बजाज को प्रकाश बाजपेयी लिख दिया। नामांकन फॉर्म भरते समय विधायक नवाब जान की जगह नवाब शाह लिख दिया गया। हालांकि इस पर हस्ताक्षर नवाब जान के ही हैं। शपथ पत्र में भी कुछ खामी रह गई।
नामांकन के साथ शुरू हुआ शह-मात का खेल
10 सीटों पर 11 प्रत्याशी हो जाने पर शह-मात का खेल मंगलवार को नामांकन दाखिल होने के बाद से ही शुरू हो गया था। निर्वाचन अधिकारी ने मंगलवार शाम जब उम्मीदवारों के शपथ पत्रों की प्रति जारी की, तभी से बसपा और भाजपा ने सपा समर्थित निर्दलीय प्रकाश बजाज के नामांकन पत्र में खामियां तलाशनी शुरू कर दी थीं। चुनावी राजनीति के दिग्गजों ने प्रकाश बजाज के नामांकन में कमी तलाश ली और उन्हें घेरने की तैयारी शुरू कर दी।