राजनाथ सिंह की जगह अमित शाह के भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते ही यूपी के भाजपाइयों का दिल भी दिल्ली जाने को मचलने लगा है।
कुछ ने तो दिल्ली में डेरा भी डाल दिया है और सुबह से शाम तक नेताओं के दरबार में हाजिरी लगा रहे हैं।
तरह-तरह के तर्क दे रहे हैं। इनमें युवा भाजपाई हैं तो उम्रदराज नेता भी। शामिल वह भी हैं जो लंबे समय से पार्टी की मुख्यधारा से बाहर हैं।
किसी को किसी समीकरण के जरिये अच्छे दिन आ जाने का भरोसा है तो कोई अन्य कारणों से पद मिलने की आस लगाए हुए है।
भरोसेमंद लोगों को टीम में शामिल करेंगे शाह
दरअसल, सामने खड़ी चुनौतियों के मद्देनजर शाह अपने भरोसे के लोगों की टीम बनाना चाहेंगे। जो उनके कंधे से कंधा मिलाकर चल सके।
शाह कभी नहीं चाहेंगे कि जिस प्रदेश ने भाजपा गठबंधन को लोकसभा की 80 में 73 सीटें देकर उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचाया है, वहां किसी वजह से उनकी पकड़ पर सवालिया निशान लगे।
उन्हें यह भी पता है कि निकट भविष्य में यूपी में विधानसभा की 12 सीटों पर उप चुनाव होने हैं। इनमें 11 सीटें वह हैं जहां भाजपा के ही विधायक थे।
एक भी सीट पर पराजय उनकी किरकिरी करा सकती है। इससे विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर भी विपरीत असर पड़ेगा। इसलिए भी उनकी टीम में यूपी की भागीदारी बढ़ना स्वाभाविक है।
अब तक आठ पदाधिकारी भाजपा की केंद्रीय टीम में थे
अभी तक उप्र से राजनाथ सिंह सहित आठ पदाधिकारी भाजपा की केंद्रीय टीम में थे। इनमें कल्याण सिंह, उमा भारती, मुख्तार अब्बास नकवी व सतपाल मलिक चार उपाध्यक्ष थे।
रामलाल महामंत्री संगठन, वरुण गांधी महामंत्री और विनोद पांडेय मंत्री बनाए गए थे। उमा अब मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री बन चुकी हैं।
कल्याण सिंह को राज्यपाल बनाने की चर्चा है। वह राज्यपाल न भी बनें तो भी उन्हें शाह की टीम में शामिल करने की संभावना कम ही दिख रही है।
एक तो शाह भी नहीं चाहेंगे कि उनके साथ इतने वरिष्ठ लोग काम करें जिनसे काम लेना खुद उनके लिए मुश्किल हो जाए।
ऊपर से संघ नेतृत्व भी पिछले कुछ वर्षों से जिस तरह उम्रदराज लोगों के लिए अलग काम की योजना पर काम कर रहा है, उसके चलते भी कल्याण के लिए कोई दूसरी भूमिका तय हो सकती है। महामंत्री संगठन रामलाल को भी नई भूमिका सौंपे जाने की चर्चा है।
ये नेता लगा रहे हैं दिल्ली के फेरे
कई नेताओं की नजर दिल्ली पर: ज्यादा परिवर्तन न हो तो भी अमित शाह की टीम में कम से कम तीन-चार नए लोगों के समायोजन की गुंजाइश है।
इसीलिए यूपी भाजपा के कई लोगों ने दिल्ली में डेरा डाल रखा है तो कुछ यूपी से ही दिल्ली के समीकरण साधने में जुटे हैं। प्रदेश उपाध्यक्ष शिवप्रताप शुक्ला, स्वतंत्रदेव सिंह व विधान परिषद सदस्य महेन्द्र सिंह अपने लिए संभावना तलाश रहे हैं।
तीन पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भी शाह की टीम में भागीदारी की कोशिश में लखनऊ से दिल्ली की भागदौड़ कर रहे हैं।
एक समय पार्टी के फायर ब्रांड हिंदू चेहरा माने जाने वाले विनय कटियार राजनाथ की टीम से बाहर थे। जानकारी के मुताबिक, वह भी शाह की टीम में अपनी संभावनाएं टटोल रहे हैं।
ये भी हैं जुगत में
भाजपा युवा मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दयाशंकर सिंह व मोर्चा की मौजूदा राष्ट्रीय कार्यसमिति का हिस्सा शिवभूषण सिंह सहित कई युवा चेहरे भी नई भूमिका पाने के लिए दौड़भाग में जुटे हैं।
इन्हें भरोसा है कि राजनाथ सिंह के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटने के बाद पार्टी के मोर्चा व प्रकोष्ठों का नेतृत्व यूपी को सौंपा जा सकता है। इससे उन्हें युवा मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का मौका मिल सकता है।
महिला मोर्चा की अध्यक्षी भी यूपी के कोटे में आने की उम्मीदों पर भाजपा की कई महिला नेता दिल्ली में जमी हैं। पार्टी प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक और डॉ. मनोज मिश्र भी दिल्ली में पैठ बनाने की जुगत में हैं।