मल्हनी विधानसभा सीट पर इस बार कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। इस पर दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। भाजपा और बसपा ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है, जिससे कौन बाजी मारेगा यह कोई समझ नहीं पा रहा है। इस सीट पर रोमांचक मुकाबला होने की वजह से सबकी नजरें लगी हुई हैं।
साल 2012 में गठित मल्हनी विधानसभा सीट सपा का गढ़ मानी जाती है। पहले यह सीट रारी के नाम से जानी जाती थी। 1998 में भदोही जनपद के सर्रोई में मुठभेड़ में पुलिसिया दावे में मृत, लेकिन हकीकत में जिंदा बचकर निकलने वाले धनंजय सिंह पहली बार रारी सीट से साल 2002 में निर्दल चुनाव लड़े थे। तब वे सपा से मैदान में उतरे पूर्व मंत्री श्रीराम यादव को हराकर विधायक बने थे। इसके बाद जदयू से दूसरी बार साल 2007 में फिर विधायक बने। 2009 में बसपा से सांसद हो जाने पर धनंजय सिंह ने उपचुनाव में अपने पिता राजदेव सिंह को बसपा से चुनाव लड़ाया और वह भी जीते थे। साल 2012 में रारी का भौगोलिक क्षेत्र बदल गया और बक्शा, सिकरारा, सिरकोनी और करंजाकला ब्लॉक के गांवों को मिलाकर मल्हनी विधानसभा क्षेत्र बना। इसके बाद यह सीट सपा के लिए गढ़ बन गई। हालांकि, धनंजय सिंह का परिवार इस सीट पर कब्जा जमाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। साल 2012 में हुए पहले चुनाव में सपा ने यहां से पूर्व कैबिनेट मंत्री पारसनाथ यादव को उतारा था। उन्होंने धनंजय सिंह की पत्नी निर्दल प्रत्याशी जागृति सिंह को हराकर चुनाव जीता था। जागृति दूसरे नंबर पर रही थीं। इसके बाद 2017 में पारसनाथ को टक्कर देने के लिए खुद धनंजय सिंह निषाद पार्टी के टिकट से उतरे, लेकिन उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा था।
इसके बाद से ही दोनों नेता क्षेत्र में अपना प्रभाव जमाने में लगे हैं। पिछले वर्ष जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में सपा को करारी शिकस्त देकर पत्नी श्रीकला धनंजय सिंह को जिला पंचायत अध्यक्ष बनाया। इसके बाद विधानसभा चुनाव के लिए जब किसी प्रमुख दल ने टिकट नहीं दिया तो अपने करीबी बिहार के सीएम नीतीश कुमार से मिले और जदयू से चुनावी समर में कूद पड़े हैं। उनके सामने दोबारा सपा के लकी यादव मैदान में उतरे हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव खुद मोर्चा संभाले हुए हैं। वे धनजंय सिंह पर लगातार हमले कर रहे हैं। भाजपा ने साल 2014 में जौनपुर के सांसद रहे डॉ. केपी सिंह को उतारा है, जो पूर्व मंत्री स्व. उमानाथ सिंह के बेटे हैं। वह 2019 में लोकसभा चुनाव हार गए थे, लेकिन इस विधानसभा क्षेत्र से रिकॉर्ड मत पाए थे। जबकि बसपा ने शैलेंद्र यादव को प्रत्याशी बनाकर लड़ाई को रोचक बना दिया है।
यादव 1.08 लाख
क्षत्रिय 45 हजार
ब्राह्मण 42 हजार
एससी 58 हजार
निषाद, बिंद 31 हजार
मुस्लिम 23 हजार
चौहान 22 हजार
अन्य 49 हजार
उप चुनाव का परिणाम
लकी यादव, सपा 73,462
धनंजय सिंह, निर्दल 68,838
मनोज सिंह, भाजपा 28,860
जय प्रकाश दुबे, बसपा 25,180