कांग्रेस, सपा और बसपा ने मुस्लिम प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतारकर समीकरण ही बदल दिए हैं। चुनावी तपिश बढ़ने के साथ ही यहां मुद्दे हाशिए पर चले गए। सभी का जोर ध्रुवीकरण पर है। इस सीट पर दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है।
जौनपुर (सदर) सीट पर सबसे अधिक प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव इस सीट पर लगातार दूसरी बार कमल खिलाने का सपना संजोए हैं। वहीं कांग्रेस, सपा और बसपा ने मुस्लिम प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतारकर समीकरण ही बदल दिए हैं। चुनावी तपिश बढ़ने के साथ ही यहां मुद्दे हााशिए पर चले गए। सभी का जोर ध्रुवीकरण पर है। इस सीट पर दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है।
विज्ञापन
सदर सीट पर सबसे अधिक मुस्लिम मतदाता हैं। साल 2017 में मतों के ध्रुवीकरण से 2002 के चुनाव के बाद कमल खिला था। प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव पहली बार चुनावी मैदान में उतरे थे। सपा ने 1993 में इसी सीट से बसपा के टिकट पर विधायक रहे मोहम्मद अरशद खान को अपना प्रत्याशी बनाया है। हालांकि, उनके पहले सपा से तेज बहादुर मौर्य को पार्टी ने चुनाव चिह्न दिया था, जिन्हें साल 2012 में कांग्रेस के प्रत्याशी नदीम जावेद हराकर विधायक बने थे। हालांकि, कांग्रेस ने अपने ही जिलाध्यक्ष फैसल हसन तबरेज का ऐन वक्त पर टिकट काटकर नदीम जावेद को फिर से चुनावी मैदान में उतार दिया है। वहीं, बसपा ने सलीम खान को प्रत्याशी बनाया है।